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हाईकोर्ट ने फ्रीज बैंक-खाते को पुन:चालू करने के दिए आदेश:विवादित राशि को छोड़ बाकी राशि निकालने और ATM चालू करने के निर्देश


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

हाईकोर्ट ने फ्रीज बैंक-खाते को पुन:चालू करने के दिए आदेश:विवादित राशि को छोड़ बाकी राशि निकालने और ATM चालू करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने फ्रीज बैंक-खाते को पुन:चालू करने के दिए आदेश:विवादित राशि को छोड़ बाकी राशि निकालने और ATM चालू करने के निर्देश

झुंझुनूं : राजस्थान उच्च न्यायालय ने बैंक खातों को फ्रीज करने के मामलों में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साइबर अपराध के संदेह में पूरी तरह फ्रीज किए गए एक बैंक खाते को फिर से चालू करने के आदेश दिए है। न्यायाधीश मनीष शर्मा की अदालत ने निर्देश दिए कि खाते में मौजूद केवल विवादित राशि को छोड़कर, बाकी बचे पैसों के लेनदेन और एटीएम को तुरंत शुरू किया जाए।

यह है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, झुंझुनूं जिले के बड़लवास निवासी जयदीप का पिपराली रोड, सीकर और झुंझुनूं स्थित SBI बैंक में एक खाता था। इस खाते में देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 13 लाख रुपए आए थे। पुलिस को संदेह था कि यह पैसा साइबर अपराध से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर पुलिस की कार्रवाई के बाद बैंक ने जयदीप के खाते को पूर्णतः बंद (फ्रीज) कर दिया था।

बैंक अधिकारियों ने नहीं सुनी गुहार

खाता बंद होने के बाद पीड़ित जयदीप ने बैंक के चक्कर काटे और अधिकारियों से खाता फिर से शुरू करने का निवेदन किया। जयदीप का कहना था- वह खुद एक केंद्रीय कर्मचारी हैं और खाता बंद होने की वजह से उन्हें और उनके परिवार को भारी आर्थिक संकट और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद बैंक प्रबंधन ने खाता चालू नहीं किया।

हाईकोर्ट में दी चुनौती

बैंक से कोई राहत न मिलने पर जयदीप ने जयपुर उच्च न्यायालय की शरण ली। उन्होंने अपने अधिवक्ता (वकील) संजीव कुमार महला के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की। अदालत में बहस के दौरान अधिवक्ता ने दलील दी कि बैंक बिना किसी सक्षम न्यायालय की अनुमति या ठोस कानूनी आदेश के किसी भी नागरिक का खाता इस तरह पूरी तरह बंद नहीं कर सकता। बैंक द्वारा किया गया यह कार्य पूरी तरह से विधि विरुद्ध है। प्रार्थी एक सरकारी कर्मचारी है और उसका पूरा खाता सीज होने से उसकी दैनिक आजीविका प्रभावित हो रही है।

न्यायाधीश मनीष शर्मा ने अधिवक्ता संजीव महला द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों और आधारों को सही माना और उनसे सहमति जताई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि खाते में आई विवादित राशि (13 लाख रुपए) को होल्ड रखा जाए, लेकिन इसके अलावा खाते में मौजूद अन्य राशि के उपयोग, सामान्य लेनदेन और ATM सेवा को तुरंत बहाल किया जाए।

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