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एफआरटी टीम ने छोड़ा काम, शहर अंधेरे में; फतेहपुर सिटी के तकनीकी सहायकों ने संभाला मेंटेनेंस का मोर्चा..! ​सुपरवाइजर बोला– “अधिकारियों ने रुकवाया काम, कॉमरेडो ने डाल रखा है पंगा”,


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एफआरटी टीम ने छोड़ा काम, शहर अंधेरे में; फतेहपुर सिटी के तकनीकी सहायकों ने संभाला मेंटेनेंस का मोर्चा..! ​सुपरवाइजर बोला– “अधिकारियों ने रुकवाया काम, कॉमरेडो ने डाल रखा है पंगा”,

​खेल या घालमेल? JEN के खाते में ₹23,500 ट्रांसफर होने की एंट्री ने खड़े किए बड़े सवाल, चर्चाओं का बाजार गर्म!

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान

​फतेहपुर : एक तरफ देश-प्रदेश की सरकारें ‘घर-घर बिजली, हर वक्त बिजली’ का ढिंढोरा पीटते नहीं थकतीं, वहीं दूसरी तरफ सीकर के फतेहपुर में सरकारी दावों की आए दिन पोल खुल रही है। यहाँ बिजली विभाग, ठेका कंपनी (संधा एंड कंपनी) और कर्मचारियों की आपसी खींचतान के चलते फतेहपुर की जनता इस भीषण गर्मी में बिना बिजली के ‘अंधेरे’ में आंसू बहाने को मजबूर है। ठेकेदार और कंपनी के बीच चल रही नूराकुश्ती के कारण पिछले दो दिनों से एफआरटी के कर्मचारियों ने फॉल्ट सुधारने का काम पूरी तरह बंद कर रखा है, जिससे पूरी व्यवस्था पटरी से उतर गई है।

कस्बे में अंधेरा

​कर्मचारियों का फूटा दर्द: “न वेतन का ठिकाना, न करंट लगने पर इलाज का सहारा”
जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम ने जब एफआरटी के ठेकेदार और कर्मचारियों से ग्राउंड जीरो पर बातचीत की, तो अंदर का दर्द और आक्रोश बाहर आ गया। कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा: “हमें हर बार ‘अगले महीने पेमेंट करेंगे’ कहकर टरका दिया जाता है, वो अगला महीना कभी आता ही नहीं।”

​जान जोखिम में, पर सुध लेने वाला कोई नहीं:

कर्मचारियों का संगीन आरोप है कि हाल ही में लाइन पर काम करते समय दो कर्मचारियों को करंट लग गया। कंपनी ने न तो उनके इलाज के पैसे दिए और न ही उनका हालचाल पूछा। आखिर गरीब कर्मचारी अपनी जेब से पैसे लगाकर कब तक इलाज करवाएगा? इसी नाराजगी में टीम ने काम ठप कर दिया है।

सुपरवाइजर का तर्क और JEN के खाते में ₹23,500 की एंट्री
​दूसरी तरफ, संधा एंड कंपनी के सुपरवाइजर भगवाना राम ने अपनी अलग बात बताई हैं उन्होंने ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ते हुए कहा, “अधिकारियों ने काम रुकवा रखा है। वे कहते हैं पूरे कर्मचारी लगाओ। हम बाहर के लोग हैं, ऊपर से कॉमरेडो ने अलग पंगा डाल रखा है।”

जे ई एन जैतिंन यादव के खाते में 23500 की एंट्री

​पेमेंट रोकने पर सुपरवाइजर ने जो तर्क दिया, उन्होंने कहा, “एक महीने का भुगतान नियमानुसार रोका जाता है, क्योंकि कल को कोई (कर्मचारी) कुछ बेचकर खा जाए तो हम किसे ढूंढेंगे? निगम हमारे पैसे काट लेता है, इसलिए इस ‘चोरी के डर’ को बनाए रखने के लिए एक महीने का पेमेंट रोका जाता है।”बाकी हर 20 तारीख को पेमेंट कर दिया जाता हैं।

​सुपरवाइजर ने दावा किया कि करंट लगे कर्मचारी का इलाज सीकर के गुरु कृपा अस्पताल में कराया गया था। उन्होंने बताया कि सिटी जेईएन जतिन यादव ने उन्हें जो इलाज के बिल भेजे थे, उसके एवज में उन्होंने खुद जेईएन जतिन यादव के खाते में करीब 23,500 रुपये ट्रांसफर किए हैं, जिसके एंट्री के सबूत भी होने की बात कही जा रही है। अब सरकारी अधिकारी के खाते में ठेका कंपनी द्वारा इतनी बड़ी रकम क्यों और किस हैसियत से ट्रांसफर की गई? यह फतेहपुर के गलियारों में गहरी जांच और चर्चा का विषय बन गया है।

करंट लगे कर्मचारी के इलाज के दस्तावेज

​भले ही ठेकेदारों, अधिकारियों और संधा एंड कंपनी के बीच ‘अंदरूनी खेल’ जो भी चल रहा हो, लेकिन इसकी असली कीमत फतेहपुर की बेकसूर जनता चुका रही है। बिजली गुल होने की वजह से मोमिनपुरा मोहल्ले में रमजान की चक्की के पास वाले इलाके में 4 घंटे से अधिक समय तक सप्लाई पूरी तरह ठप हैं। इस भीषण गर्मी में बच्चे, बूढ़े और बीमार लोग बूंद-बूंद पसीने में तर होकर तड़पते रहे, लेकिन सिस्टम को कोई फर्क नहीं पड़ा।

तकनीकी सहायकों ने संभाला मोर्चा, अधिकारियों की साख दांव पर
​जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो विभाग को अपने पुराने ‘सारथियों’ याद आई। कस्बे में बिगड़ी बिजली व्यवस्था को संभालने के लिए ऑफिस के रेगुलर तकनीकी सहायकों (टेक्निकल हेल्पर्स) को फील्ड में उतारा गया है, जो फिलहाल फॉल्ट सुधारने का मोर्चा संभाले हुए हैं।

इनका क्या कहना हैं:
“उनकी आपसी लड़ाई से हमें क्या लेना-देना”
​”उनकी आपस में क्या बात या लड़ाई है, उससे मेरे कार्यालय को कोई लेना-देना नहीं है। हमारे ऑफिस के तकनीकी सहायकों (टेक्निकल हेल्पर्स) की टीम काम पर लगी हुई है और शहर की सप्लाई को जल्द से जल्द पूरी तरह सुचारू करवा दिया जाएगा।” – धर्मेंद्र सैनी, सहायक अभियंता (AEN), फतेहपुर सिटी शाखा

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