50 लाख का रेन वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक खराब हुआ:काई जमा होने से पूरा पानी हरा हुआ, रेलिंग-कुर्सियां टूटी, टैंक में तैर रहे प्लास्टिक और थैलियां
50 लाख का रेन वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक खराब हुआ:काई जमा होने से पूरा पानी हरा हुआ, रेलिंग-कुर्सियां टूटी, टैंक में तैर रहे प्लास्टिक और थैलियां
झुंझुनूं : सरकार जहां एक तरफ वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान का जोरों-शोरों से गुणगान कर रही है। वहीं दूसरी ओर झुंझुनूं के चेजारान इलाके में पहाड़ काटकर बनाया गया 50 लाख का रेन वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक तमाम दावों की पोल खोल रहा है। टैंक में भरा पानी खराब हो चुका है, चारों तरफ काई जम चुकी है। कचरे का अंबार लगा हुआ है। मानसून दरवाजे पर लेकिन नगर परिषद गहरी नींद में सोया हुआ है।
कुछ सालों पहले पहाड़ों को काटकर करीब 150 से 200 फीट लंबा और गहरा एक बेहद आलीशान जल संग्रहण (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) टैंक बनाया गया था। इसके पीछे बनाने का मकसद- बारिश के पानी को इकट्ठा करना था, ताकि शहर का गिरता हुआ भूमिगत जल स्तर सुधर सके, लेकिन हालात ये है कि यह टैंक खुद अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। जिसकी सुध लेना वाला कोई नहीं है।
कुछ ही दिनों में मानसून दस्तक देने वाला है। अगर समय रहते हुए ध्यान नहीं दिया गया तो जनता की गाढ़ी कमाई पूरी तरह मिट्टी में मिल जाएगी।
49.51 लाख रुपए का खर्च आया था
इसे बनाने में 49.51 लाख रुपए की लागत आई थी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक तैयार होने के बाद शिलापट्ट (उद्घाटन पत्थर) लगाया गया था। इस तख्ती पर मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन विधायक (और वर्तमान सांसद) बृजेंद्र सिंह ओला और नगर परिषद की सभापति नगमा बानो का नाम बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है।
इस टैंक को बारिश का साफ पानी एकत्रित करने के लिए बनाया गया था ताकि काम में लिया जा सकें। लेकिन अब हालात ये है कि आज यह एक गंदे नाले और कचरा डिपो में तब्दील हो चुका है। टैंक में जमा पानी पूरी तरह सड़ चुका है और काई जमने के कारण पानी हरा हो गया है। पूरे टैंक में चारों तरफ सिर्फ प्लास्टिक, थैलियां और गंदगी तैर रही है।
लाखों की रेलिंग टूटी, कुर्सियां गायब
लोगों के बैठने के लिए परिसर में कुर्सियां लगाई गई थी, लेकिन वह भी अब टूट चुकी है। सुरक्षा के लिए टैंक के चारों तरफ लकड़ी के खूबसूरत डिजाइन वाली आकर्षक रेलिंग लगाई गई थी, ताकि कोई दुर्घटना न हो। अब वह रेलिंग भी जगह-जगह से टूट चुकी है।
टैंक का बनाने का मकसद फेल
मोहल्ले के निवासी जाकिर हुसैन ने बताया- इस टैंक को बनाने का जो असली मकसद था, वह पूरी तरह फेल हो चुका है। पहाड़ को काटकर बनाए गए इस टैंक में लीकेज है। इसके चलते मानसून में जो भी बारिश का पानी इकट्ठा होता है, वह मुश्किल से 2 महीने से ज्यादा जमा नहीं रहता है। सारा पानी नीचे से रिसकर बह जाता है और टैंक खाली हो जाता है।





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