खोखले दावों और आदेशो पर आंखे मूंदकर सो रहा बिजली महकमा:फतेहपुर में फिर करंट से झुलसा FRT कर्मचारी; सीकर रेफर, एम्बुलेंस तक नही हुई नसीब! निजी वाहन से पहुंचाया धानुका अस्पताल..
लापरवाही का रिपीट टेलीकास्ट: कृष्ण कुमार और सुरेंद्र के बाद अब प्रमोद कुमार हुए करंट का शिकार
जनमानस शेखावाटी न्यूज विशेष रिपोर्ट: आबिद खान
फतेहपुर : कानून की किताबों में ‘राइट टू लाइफ’ (जीने का अधिकार) और ‘सुरक्षित कार्यस्थल’ के बड़े-बड़े प्रावधान हैं। मगर अजमेर विद्युत वितरण लिमिटेड की फतेहपुर सिटी शाखा में नियम और आदेश सिर्फ पन्नों पर धूल फांक रहे हैं, सीकर जिले के बिजली विभाग की शाखाओं के कारनामे देखकर तो यही लगता है। यहाँ का बिजली विभाग का सिस्टम “जुगाड़” और “लापरवाही के कॉकटेल” पर चल रहा है, जहाँ कृष्ण कुमार की मौत और घायल सुरेंद्र के बाद हर रोज एक गरीब एफआरटी कर्मचारी की जिंदगी को मौत के ट्रांसफार्मर पर दांव पर लगा दी जाती है। मंगलवार को सालासर पुलिया के पास जो हुआ, वह महज़ एक ‘हादसा’ नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा किया गया ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’ (अपराधिक लापरवाही) का जीवंत उदाहरण है।
जलालसर निवासी 30 वर्षीय FRT कर्मचारी प्रमोद कुमार ढाका पुत्र शिशुपाल, विभाग की रीढ़ बनकर ट्रांसफार्मर बदल रहा था, लेकिन सुरक्षा के नाम पर उसके पास क्या था? ये बड़ा सवाल हैं। सिर्फ अधिकारियों के कागजी खोखले वादे! और वो आदेश जो फाइलों में दफन हैं। नतीजा करंट की चपेट में आने से प्रमोद बुरी तरह झुलस गया। और उसे निजी वाहन से धानुका अस्पताल ले जाया गया।

तड़पते रहे कर्मचारी, नहीं मिली एम्बुलेंस
इस समूचे घटनाक्रम ने राज्य की स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। जनमानस शेखावाटी न्यूज पुरजोर तरीके से यह कानूनी और नैतिक सवाल उठाता है कि इस गंभीर आपातकालीन स्थिति में ‘108 सरकारी एम्बुलेंस’ मौके पर क्यों नहीं पहुंची? लहूलुहान और झुलसे हुए एफआरटी कर्मचारी प्रमोद कुमार को आनन-फानन में निजी वाहन से धानुका अस्पताल ले जाना पड़ा, जहाँ से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सीकर रेफर कर दिया गया। क्या सरकारी एम्बुलेंस सिर्फ वीआईपी दौरों के लिए आरक्षित हैं?

’जनमानस शेखावाटी की खबरों पर लगी मुहर, खबरों को ठेंगा दिखाने का अंजाम: फिर मौत के मुंह में धकेला गया युवा कर्मचारी, ‘जुगाड़’ के भरोसे चल रहा सीकर का बिजली तंत्र?
यह कोई पहली घटना नहीं है। जनमानस शेखावाटी न्यूज ने खोजी पत्रकारिता के अपने ऊंचे मापदंडों और सामाजिक सरोकार को निभाते हुए पूर्व में भी लगातार बिजली विभाग के इस ‘डेथ ट्रैप’ (मौत के कुएं) नुमा इस लापरवाह सिस्टम पर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। हमने बार-बार चेताया था कि बिना सेफ्टी सिस्टम के काम करवाना ‘इंडस्ट्रियल सेफ्टी एक्ट’ (औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम) का खुला उल्लंघन है। लेकिन, वातानुकूलित कमरों में बैठे हुक्मरानों की ‘अंधेरी बहरी’ व्यवस्था ने हमारी हर चेतावनी को नजरअंदाज किया, और हल्के में लिया जिसका खामियाजा आज घायल प्रमोद भुगत रहा है। और हो सकता हैं कल और कोई भुगते..
अतीत के पन्नों में दफन चीखें:कृष्ण कुमार की मौत और धरनों से भी नहीं टूटी नींद! फतेहपुर विद्युत विभाग बन चुका है ‘डेथ ट्रैप
याद रहे, इसी लापरवाही की भेंट चढ़कर पूर्व में कृष्ण कुमार नामक एफआरटी कर्मचारी असमय काल के गाल में समा गया था (स्वर्ग सिधार गया था)। तब कॉमरेडों, शहर के युवाओं और जिम्मेदार नागरिकों ने महकमे के खिलाफ आक्रोश का बिगुल फूंकते हुए धरना दिया था। इसके बावजूद सिस्टम नहीं जागा और इसके बाद करंट से झुलसा सुरेंद्र बांठोद भी मौत के मुंह से लड़कर वापस आया था।
सीकर की कई शाखाओं में जुगाड़ से चल रहा हैं बिजली विभाग
रामगढ़ शाखा की ताजा तस्वीरें तो और भी भयावह हैं, जहाँ विभाग की इंजीनियरिंग का एक नया ही नमूना सामने आया हैं। होदसर गांव में कैंपर गाड़ी को ही ‘जुगाड़ का लिफ्ट’ बनाकर नियमों को धता बताते हुए मेंटेनेंस किया जा रहा है। जहां उनके पास सीढ़ी तक नसीब नही हैं। क्या विभाग किसी और बड़ी शहादत का इंतजार कर रहा है? लगातार प्रकाशित खबरों के बावजूद अधिकारी नदारद दिख रहे हैं। और सेफ्टी जैसे महत्वपूर्ण मामले को हल्के में लेते नजर आ रहे हैं।
घायल फोटो लेने को लेकर अस्पताल में बहस…
सूत्रों के अनुसार धानुका अस्पताल में घायल का फोटो लेने को लेकर भी बहस हुई जहां वहां मौजूद निगम के लोगो ने घायल का फोटो खींचने से इंकार कर दिया गया कॉमरेड कपिल ने बताया कि हमारे कार्यकर्ता कैलाश बलारा द्वारा सेफ्टी को लेकर अधिकारियों से अस्पताल में सवाल पूछे जाने और घायल की स्थिति पर पूछे जाने पर सिटी शाखा के जेईएन जतिंन यादव भड़क गए और उन्होंने कहा कि चुप रह तू कोन होता हैं। अगर ऐसा हैं तो बिजली विभाग के अधिकारियों का ये रवैया मामले को दबाने का प्रयास कर रहा हैं।
बड़ा सवाल ये हैं कि क्या अधिकारी ऐसा रोड़ मैप तैयार नहीं कर सकते क्या जिस से कर्मचारियों की सेफ्टी फर्स्ट हो सके और उन्हे किसी के साथ बहस करने की नोबत ना आए। क्या अधिकारी इस मामले को दबाकर अपनी कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
इन्होंने कहा की
”काफी समझा दिया, नहीं मानते। शपथ भी दिलाते हैं, सेफ्टी के बारे में समझाते हैं लेकिन इनके समझ नहीं आ रहा।” पुलिया के पास ये करंट लगा हैं। निजी वाहन से धानुका अस्पताल पहुंचा दिया गया हैं। – सहायक अभियंता (ए ई एन) धर्मेंद्र सैनी
कर्मचारी लापरवाही करते हैं। हेलमेट वाली बात है, हेलमेट जीवन बचाता है,लेकिन कई लोग नही लगाते लापरवाही में ये लोग झुलस जाते हैं। जांच चल रही है।” सेफ्टी के लिए जोर दिया जाता हैं लेकिन ये लोग मानते समझते कहां हैं। – शिवपाल कासनिया (एक्सईएन, फतेहपुर): “
मैं एक बार व्यस्त हूं। इस मामले में आपको बाद में जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी मेरे नाम का क्या करोगे आपको क्या लेना हैं। मेरी किसी से कोई बहस नही हुई हमारा आदमी घायल हो गया हम घबराए हुए थे। – जैतिन यादव जेईएन सिटी फतेहपुर
जनमानस शेखावाटी न्यूज के सीधे सवाल
हुजूर! क्या महज ‘शपथ’ दिला देने से या ‘हेलमेट’ की बात कह देने से या अधिकारी नाम तक पूरा नहीं बताने से बिजली विभाग अपनी ‘वाइकेरियस लायबिलिटी’ (प्रतिनिधिक दायित्व) से मुक्त हो जाता है? ‘द लेबर लॉ’ और ‘वर्कमैन कॉम्पन्सेशन एक्ट’ के तहत यह नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह कार्यस्थल पर शत-प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करे। अगर कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के पोल पर चढ़ रहे थे, तो लाइनमैन या सुपरवाइजर ने काम क्यों नहीं रुकवाया? क्या अधिकारियों के पास केवल ‘जांच’ का झुनझुना और ‘कर्मचारियों को दोषी’ ठहराने और खोखले दावे और आदेशों का ही विकल्प बचा है?
आखिर कब तक जुगाड़ी सिस्टम से जनता के साथ ये खेल बिजली विभाग के अधिकारी खेलते रहेंगे?
अब खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, जनमानस शेखावाटी न्यूज इस मामले को तब तक उठाता रहेगा जब तक फतेहपुर के इस ‘लापरवाह बिजली तंत्र’ की जवाबदेही तय नहीं हो जाती। देखना होगा कि खबर चलने के बाद सीएमडी आरती डोगरा और एमडी के पी वर्मा इस मामले पर क्या एक्शन लेते हैं क्योंकि सीकर का बिजली विभाग आज भी जुगाड़ी सिस्टम से चल रहा हैं।
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