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खेतड़ी के खरखड़ा में कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज, जल संकट के बीच नाले में बह रहा पेयजल


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खेतड़ी के खरखड़ा में कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज, जल संकट के बीच नाले में बह रहा पेयजल

वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान पर उठे सवाल: अधिकारियों को जानकारी, फिर भी 4 माह से बह रहा हजारों लीटर पानी

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : विजेन्द्र शर्मा

खेतड़ी : उपखंड क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच गांवों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। क्षेत्र के अनेक गांवों में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। कहीं टैंकरों की मांग की जा रही है तो कहीं कई दिनों तक नलों में पानी नहीं पहुंचने से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में खरखड़ा गांव में विभागीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है।नानुवाली बांवड़ी-खरखड़ा सड़क मार्ग पर स्थित सिलाटी माता मंदिर के पास खेतड़ी से गोठड़ा जा रही कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मुख्य राइजिंग पाइपलाइन में पिछले करीब चार माह से लीकेज बना हुआ है। इस लीकेज के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पेयजल नाले में बहकर व्यर्थ हो रहा है। एक ओर क्षेत्र के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पेयजल की यह बर्बादी विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय ग्रामीणों एवं नानुवाली बांवड़ी सरपंच रमेश सैनी, अशोक सैनी, रामावतार सैनी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पाइपलाइन में हुआ लीकेज काफी बड़ा है, जिससे दिन-रात लगातार पानी बहता रहता है। नाले में बह रहे पानी को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन हजारों लीटर पानी व्यर्थ जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पानी का संरक्षण किया जाए तो आसपास के कई गांवों की पेयजल आवश्यकता पूरी हो सकती है।

4 माह से बह रहा पानी, फिर भी नहीं जागा विभाग

ग्रामीणों के अनुसार कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मुख्य राइजिंग पाइपलाइन में पिछले करीब चार माह से लीकेज बना हुआ है। कई बार शिकायत करने और अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। लीकेज के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पेयजल नाले में बहकर व्यर्थ हो रहा है, जबकि क्षेत्र के कई गांव जल संकट से जूझ रहे हैं।

जय नारायण सहित ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों को अवगत कराया जा चुका है। अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। कई बार अस्थायी मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही समय बाद पाइपलाइन दोबारा लीकेज हो गई। चार माह बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

शिकायतें, निरीक्षण और आश्वासन… लेकिन समाधान अब भी नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि जलदाय विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार लीकेज की जानकारी दी जा चुकी है। विभाग द्वारा समय-समय पर अस्थायी मरम्मत तो की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पाइपलाइन दोबारा लीकेज हो गई। चार माह बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है जब राज्य सरकार पूरे प्रदेश सहित झुंझुनूं जिले में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान चला रही है। प्रशासनिक अधिकारी, मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभाग जल संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, श्रमदान कर रहे हैं तथा लोगों को पानी बचाने की शपथ दिला रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी पाइपलाइन से लगातार हजारों लीटर पेयजल का बहना जल संरक्षण के दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक तरफ आमजन को जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की उदासीनता तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा उपखंड क्षेत्र की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने के कारण बहुमूल्य पेयजल नाले में बह रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस लीकेज को ठीक कर दिया जाता तो अब तक लाखों लीटर पानी बचाया जा सकता था।

पानी के लिए तरस रहे लोग, सप्लाई लाइन से बह रहा पेयजल

खेतड़ी नगर पालिका क्षेत्र में भी पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है। शहर के कई इलाकों में लोगों को चार से पांच दिन में एक बार ही पानी मिल पा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के हालात और भी अधिक गंभीर हैं, जहां कई गांवों में सात से आठ दिन के अंतराल में पेयजल आपूर्ति हो रही है।

हाल ही में गोठड़ा गांव में पेयजल संकट को लेकर वार्ड संख्या 1 और 2 की महिलाएं एवं पुरुष नेशनल हाईवे पर पहुंच गए और जलदाय विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से दोनों वार्डों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कुंभाराम नहर परियोजना होने के बावजूद नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उल्लेखनीय है कि जिस राइजिंग लाइन में पिछले चार माह से लीकेज बना हुआ है, उसी लाइन के माध्यम से खेतड़ी नगर पालिका क्षेत्र तथा गोठड़ा गांव में पेयजल आपूर्ति की जाती है। ऐसे में जल संकट के बीच पाइपलाइन से हो रही पानी की बर्बादी लोगों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा रही है।

वंदे गंगा अभियान में जल संरक्षण की शपथ, लेकिन चार माह से बह रहा पानी

वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत 30 मई शनिवार को खेतड़ी विधानसभा क्षेत्र के दलेलपुरा गांव से अभियान का शुभारंभ किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैनिक कल्याण सलाहकार समिति अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर थे, जबकि विशिष्ट अतिथि खेतड़ी विधायक इंजीनियर धर्मपाल गुर्जर, जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग तथा अभियान के संयोजक मुकेश दाधीच मौजूद रहे।कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने जल संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा था कि वर्षा जल संचयन, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में आमजन की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं खेतड़ी विधायक इंजीनियर धर्मपाल गुर्जर ने प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई थी।

लेकिन विडंबना यह है कि जल संरक्षण की शपथ लेने के बावजूद कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मुख्य पाइपलाइन से पिछले करीब चार माह से हजारों लीटर पेयजल नाले में बहकर व्यर्थ हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं, तब इस तरह की गंभीर समस्या की अनदेखी क्यों की जा रही है। आखिर इस पानी की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन और जलदाय विभाग से तत्काल लीकेज की स्थायी मरम्मत करवाने, पानी की बर्बादी रोकने तथा इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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