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पोस्ट कार्ड के जरिए केस की स्थिति बताएगा उपभोक्ता आयोग:आपसी समझाइश से निपटाने का मौका भी देगा; जल्द आ सकेगा फैसला


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पोस्ट कार्ड के जरिए केस की स्थिति बताएगा उपभोक्ता आयोग:आपसी समझाइश से निपटाने का मौका भी देगा; जल्द आ सकेगा फैसला

पोस्ट कार्ड के जरिए केस की स्थिति बताएगा उपभोक्ता आयोग:आपसी समझाइश से निपटाने का मौका भी देगा; जल्द आ सकेगा फैसला

झुंझुनूं : लंबे समय से उपभोक्ता अदालतों में चक्कर काट रहे लोगों को जल्द राहत देने के लिए झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने एक बेहतरीन और नई शुरुआत की है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने फैसला लिया है कि अब आयोग की ओर से पीड़ित उपभोक्ता और सेवा प्रदाता (कंपनी या विपक्षी पार्टी) दोनों को सीधे पोस्टकार्ड भेजा जाएगा।

​इस पोस्टकार्ड के जरिए दोनों पक्षों को उनके मुकदमे की वास्तविक स्थिति बताई जाएगी और उन्हें मामले को आपसी समझाइश से निपटाने का एक आखिरी मौका दिया जाएगा। यह नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने जा रही है।

​उपभोक्ता आयोग के आदेशों का होगा सख्ती से पालन​

आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने साफ कहा है कि राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के परिपत्र (सर्कुलर) की भावना को पूरी तरह लागू किया जाएगा। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 38 (7) के तहत मुकदमों का एक निश्चित समय सीमा में निपटारा करना जरूरी है।

​इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग की टीम ने सोमवार से ही काम शुरू करने का संकल्प लिया है। मुकदमों की फाइलों की जांच करने और संबंधित पक्षों को पोस्टकार्ड भेजने की जिम्मेदारी आयोग के सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी और सहायक प्रशासनिक अधिकारी भीम सिंह राजपुरोहित को सौंपी गई है।

​क्यों पड़ी पोस्टकार्ड भेजने की जरूरत

​अध्यक्ष मनोज मील ने बताया कि हाल ही में आयोजित हुई प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।

  1. ​सुनवाई से गायब रहना: लोक अदालत में मामलों को आपसी समझौते (प्री-काउंसलिंग) के लिए रखा गया था और कानूनी कार्रवाई पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुनवाई के दौरान गैर-हाजिर (अनुपस्थित) रहे।
  2. ​जानबूझकर तारीखें बढ़ाना: कई मामलों में राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के फैसलों को सही माना है। यह जानते हुए भी सेवा प्रदाता (कंपनियां) जानबूझकर तारीख पर तारीख लेकर मामलों को सालों तक खींचती रहती हैं।
  3. ​राजीनामे के बाद भी फाइलें खुली रहना: कई बार उपभोक्ता और कंपनी आपस में समझौता (राजीनामा) कर लेते हैं, लेकिन इसकी जानकारी आयोग को नहीं देते। इस वजह से मुकदमों की फाइलें बेवजह सालों तक कोर्ट में चलती रहती हैं।
  4. ​नोटिस जारी न होना: बड़ी संख्या में ऐसे पुराने मामले भी मिले हैं जिनमें अभी तक आयोग के कार्यालय से समन या नोटिस ही जारी नहीं हो पाए थे, जिससे पीड़ित उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में बहुत देरी हो रही है।

​पोस्टकार्ड में क्या लिखा होगा और इसके बाद क्या होगा

​उपभोक्ता आयोग द्वारा भेजे जाने वाले पोस्टकार्ड में लिखा होगा कि आपका मुकदमा इस समय किस स्टेज (स्तर) पर है। दोनों पक्षों से अपील की जाएगी कि वे अगली सुनवाई में आकर अपने मामले का तुरंत निपटारा करवाएं।

​अध्यक्ष की अपील: “यह समझाइश का आखिरी मौका है

​आयोग के अध्यक्ष मनोज मील ने जिले के वकीलों, आम उपभोक्ताओं और सभी सेवा प्रदाताओं (कंपनियों/व्यापारियों) से अपील की है कि वे इस अनोखी पहल का फायदा उठाएं। उन्होंने कहा कि “न्याय की टेबल पर बैठकर आपसी समझाइश से मामला सुलझाने का यह आखिरी मौका है। लोक अदालत की भावना का सम्मान करते हुए अपने पुराने मुकदमों को हमेशा के लिए खत्म करवाएं, अन्यथा आयोग कड़े फैसले लेने के लिए तैयार है।

यदि पोस्टकार्ड मिलने के बाद भी पक्षकार कोर्ट में हाजिर नहीं होते हैं या मामले को नहीं सुलझाते हैं, तो आयोग फाइल पर पहले से मौजूद रिकॉर्ड और कागजातों को ही सही मानकर अपना फाइनल ऑर्डर (अंतिम फैसला) सुना देगा। इसके बाद किसी को दूसरा मौका नहीं मिलेगा।

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