नौतपा के तीसर दिन सूर्य देव का रुद्र रूप, तेज धूप और लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल
नौतपा के तीसर दिन सूर्य देव का रुद्र रूप, तेज धूप और लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा
सालासर : प्रथम ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष एकादशी 27 मई को’नौतपा’ का तीन दिन हो गया है। तीसरे दिन सूर्य भगवान ने अपना ऐसा रुद्र रूप धारण किया कि पूरा अंचल आग की भट्टी की तरह तपने लगा। आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती गर्म हवाओं (लू) के कारण न केवल मानव,बल्कि पशु-पक्षी भी पूरी तरह बेहाल नजर आए। वही ग्रामीण क्षेत्र के रामनिवास तेतरवाल ने बताया है कि। तापमान 41डिग्री के करीब, रहा जिससे लोग अपने-अपने घरों में कैद हुए दिखाई दिए। भौगोलिक रूप से भीषण गर्मी के लिए मशहूर चूरू जिले में नौतपा के तीसरे दिन भी पारे ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। दोपहर होते-होते तापमान 41डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने लगा, जिससे सड़कों पर कर्फ्यू जैसा नजारा देखने को मिला।
तेज धूप और लू के थपेड़ों के कारण लोग आवश्यक कार्यों के बिना घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इस भीषण तपिश का सीधा असर सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल सालासर बालाजी मंदिर में भी देखने को मिला। वर्ष के बारह महीने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहने वाले सालासर धाम में आज नौतपा के तीसरे दिन यात्रियों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई। दोपहर के समय मंदिर परिसर और आसपास के बाजार, जो हमेशा खचाखच भरे रहते थे, आज सूने नजर आए। गर्मी से बचाव के लिए मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्तर पर छाया व ठंडे पानी के विशेष इंतजाम किए गए हैं, लेकिन मौसम के इस रौद्र रूप के आगे श्रद्धालु भी सुबह और शाम के समय ही दर्शनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ज्योतिषीय गणना और नौतपा की सटीक जानकारी:
शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से ‘नौतपा’ का प्रारंभ माना जाता है। इस वर्ष 25 मई को सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश हुआ है, जहां वे आगामी 9 दिनों तक विराजमान रहेंगे। पंचांग के अनुसार, इस अवधि में सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हैं और उनकी किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं। रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब सूर्य (तत्व-अग्नि) रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव में आते हैं, तो वे उसकी शीतलता को पूरी तरह सोख लेते हैं। यही कारण है कि इन 9 दिनों में ब्रह्मांड में प्रचंड गर्मी का वातावरण बनता है, जिसे शास्त्रों में ‘नौतपा’ कहा गया है।
पशु-पक्षियों के लिए संकट, डॉक्टरों की सलाह गर्मी का सबसे ज्यादा असर बेजुबान पशु-पक्षियों पर देखा जा रहा है। जलाशयों के सूखनेऔर तेज धूप के कारण वे छांव और पानी की तलाश में भटकते नजर आए। मौसम वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने आमजन को इस भीषण लू से बचने के लिए दोपहर के समय बाहर न निकलने, सूती व ढीले कपड़े पहनने और लगातार ओआरएस घोल, नींबू पानी व तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है।
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