श्रीमद्भागवत कथा का हुआ विश्राम, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का श्रवण
श्रीमद्भागवत कथा का हुआ विश्राम, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का श्रवण
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक
नवलगढ़ : मोर क्षेत्र स्थित श्रीराम मंदिर श्रीआनंदम में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का विश्राम दिवस श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथाव्यास आचार्य नीरजजी शौनक के सानिध्य में कथा के अंतिम दिवस पर वेद स्तुति, नवयोगेश्वर संवाद, सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में भक्ति, संस्कार और वैराग्य को अपनाने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि कथा श्रवण से मनुष्य के विकार दूर होते हैं और ईश्वर भक्ति की प्राप्ति होती है।
अंतिम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य श्री ने त्याग, संतोष और सच्ची मित्रता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक दरिद्र वही है जिसकी इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। सुदामा का जीवन त्याग और भक्ति का प्रतीक था।
कथा में वेद स्तुति और नवयोगेश्वर संवाद के माध्यम से भक्ति, ज्ञान, माया और मोक्ष के विषय में विस्तार से बताया गया। राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग में हरि-भक्ति और भगवान के स्मरण की महिमा का वर्णन किया गया।
कथा के दौरान भजनों और कीर्तनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा विश्राम पर महाआरती एवं महाप्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर संतवृंद बिक्रमनाथजी, मुक्तिनाथजी एवं महेंद्रदासजी का सम्मान किया गया।
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