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‘वेतनभोगी कर्मचारी आपातकाल में लाखों रुपए कहां से लाए’:कर्मचारी बोले- RGHS में शर्तों का उल्लंघन कर रहे अस्पताल, कार्रवाई करें


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‘वेतनभोगी कर्मचारी आपातकाल में लाखों रुपए कहां से लाए’:कर्मचारी बोले- RGHS में शर्तों का उल्लंघन कर रहे अस्पताल, कार्रवाई करें

'वेतनभोगी कर्मचारी आपातकाल में लाखों रुपए कहां से लाए':कर्मचारी बोले- RGHS में शर्तों का उल्लंघन कर रहे अस्पताल, कार्रवाई करें

झुंझुनूं : राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना RGHS को लेकर मंगलवार को राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष राजेश बजाड़ ने कहा कि योजना की शर्तों का उल्लंघन करने वाले निजी अस्पतालों की मान्यता रद्द कर उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

हर महीने कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से अंशदान की कटौती की जा रही है। जब कोई कर्मचारी या उनके परिजन गंभीर बीमारी की स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो उसे ‘कैशलेस’ सुविधा के बजाय कैश जमा करवाया जाता है। उएक सीमित वेतनभोगी कर्मचारी आपातकाल में लाखों रुपए कहां से लाएगा?

जब एक कर्मचारी बीमारी में अस्पताल के दरवाजे पर असहाय खड़ा होता है, तो वह केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी टूट जाता है। एक कल्याणकारी राज्य में यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

कलेक्ट्रेट पर कर्मचारियों का प्रदर्शन
कलेक्ट्रेट पर कर्मचारियों का प्रदर्शन
कर्माचारियों द्वारा पुतला जलाया गया
कर्माचारियों द्वारा पुतला जलाया गया

धैर्य की परीक्षा न ले सरकार

​संघ के महामंत्री शैतान सिंह और कोषाध्यक्ष नगेन्द्र हाडा ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो कर्मचारियों की यह वेदना एक बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

ये रखी मांगें

ठप पड़ी RGHS सेवाओं को तुरंत सुचारू किया जाए। जिन कर्मचारियों ने मजबूरी में अपनी जेब से पैसा खर्च कर इलाज कराया है, उन्हें चिकित्सा बिलों का भुगतान ब्याज और हर्जाने के साथ शीघ्र किया जाए। योजना की शर्तों का उल्लंघन करने वाले निजी अस्पतालों की मान्यता रद्द कर उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इलाज के लिए मना किए जाने से कर्मचारियों को होने वाली मानसिक और आर्थिक पीड़ा पर सरकार संवेदनशीलता दिखाए।

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