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तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में अक्षय तृतीया का भव्य आयोजन


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तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में अक्षय तृतीया का भव्य आयोजन

आचार्य महाश्रमण की सन्निधि में 450 से अधिक श्रद्धालुओं ने किया वर्षीतप पारणा

लाडनूं : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्य महाश्रमण की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती, लाडनूं परिसर में सोमवार को अक्षय तृतीया महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश से पहुंचे 450 से अधिक श्रद्धालुओं ने वर्षीतप का पारणा किया।

श्रद्धालुओं ने आचार्य के पात्र में ईक्षुरस अर्पित कर अपने तप का समापन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से मेले जैसा दिखाई दिया।

पहली बार विशेष उत्साह के साथ आयोजन

तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में आचार्य महाश्रमण की सन्निधि में अक्षय तृतीया का यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और कार्यक्रम स्थल खचाखच भरा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य के मंगल महामंत्रोच्चार से हुई। साध्वीप्रमुखा एवं साध्वीवृंद ने प्रवचन से पूर्व श्रद्धालुओं को संबोधित किया और प्रज्ञागीत प्रस्तुत किए। तेरापंथ महिला मंडल लाडनूं द्वारा भी भक्ति गीतों का संगान किया गया।

‘तप की परिसम्पन्नता से जुड़ा है अक्षय तृतीया’

आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि अक्षय तृतीया तप की परिसम्पन्नता का प्रतीक है। इसी दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के वर्षीतप की पूर्णता हुई थी। उन्होंने कहा कि ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप-ये चारों मोक्ष मार्ग के आधार हैं। आचार्य ने श्रद्धालुओं को ध्यान का अभ्यास कराया और नए वर्षीतप करने वालों को संकल्प भी दिलाया। साथ ही भगवान ऋषभ के नाम मंत्रों का जाप कराया।

दीक्षा की घोषणा भी की

आचार्य ने विकास महोत्सव (20 सितम्बर 2026) पर मुमुक्षु कोमल को साध्वी दीक्षा देने की घोषणा भी की।

ईक्षुरस दान के साथ हुआ पारणा

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने आचार्य के पात्र में ईक्षुरस अर्पित कर वर्षीतप का पारणा किया। साधु-साध्वियों, समणियों और श्रावक-श्राविकाओं सहित कुल 450 से अधिक लोगों ने इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य ने सुमेरमल स्वामी (लाडनूं) के प्रयाण दिवस पर उनकी आत्मा की शांति के लिए मंगलकामना भी की।

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