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सादुलपुर में आखातीज पर खेतों में उतरे किसान:परंपरागत संकेतों से अच्छी फसल की उम्मीद, इस साल सामान्य बारिश का अनुमान


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सादुलपुर में आखातीज पर खेतों में उतरे किसान:परंपरागत संकेतों से अच्छी फसल की उम्मीद, इस साल सामान्य बारिश का अनुमान

सादुलपुर में आखातीज पर खेतों में उतरे किसान:परंपरागत संकेतों से अच्छी फसल की उम्मीद, इस साल सामान्य बारिश का अनुमान

सादुलपुर : सादुलपुर क्षेत्र में रविवार को किसानों ने आखातीज (अक्षय तृतीया) का पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया। इस मौके पर किसान अपने परिवारों के साथ सुबह-सुबह खेतों में पहुंचे और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ‘सून’ (शगुन) लिए। ग्रामीण अंचलों में यह दिन खास महत्व रखता है, क्योंकि इसी के आधार पर किसान पूरे साल की फसल और मौसम का अनुमान लगाते हैं।

धोलिया गांव के किसान रामस्वरूप फगेड़िया ने अपने परिवार के साथ खेत में सून लिया। वहीं, गुलशन भारती फगेड़िया ने बताया कि इस बार मिले संकेतों के आधार पर आने वाले वर्ष में सामान्य बारिश की संभावना दिखाई दे रही है।

पक्षियों और प्रकृति के संकेतों को माना गया शुभ

किसानों के अनुसार, आखातीज पर प्रकृति के छोटे-छोटे संकेत भविष्य की खेती का आधार माने जाते हैं। किसान बनेसिंह जाखड़ ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे से कमेड़ी पक्षी झुंड में लगातार बोलते सुनाई दिए, जिसे शुभ संकेत माना जाता है।

राजकुमार फगेड़िया के मुताबिक, खेतों में कीड़े अपने बिलों से अनाज बाहर निकालते नजर आए। परंपरा के अनुसार यह अच्छी पैदावार का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, खेत में दाईं ओर हरे सिसम के पेड़ पर सोहन चिड़िया का दिखाई देना भी शुभ माना गया।

गाय का खेत में चरना और हरियाली को माना समृद्धि का संकेत

लंबोर गांव के महेंद्र कालीरावना ने बताया कि खेतों में गाय का चरते हुए दिखाई देना भी अच्छे समय और भरपूर फसल का संकेत माना जाता है। किसानों का मानना है कि ऐसे संकेत आने वाले साल में कृषि उत्पादन बेहतर रहने और समृद्धि का इशारा करते हैं।

अनाज उगाकर किया जाता है पैदावार का आकलन

आखातीज के दिन किसान खेतों में विभिन्न प्रकार के अनाज मिलाकर छिड़काव करते हैं और मिट्टी का गोला बनाकर घर ले आते हैं। इसके बाद तीन से पांच दिन के भीतर जो अनाज सबसे तेजी से उगता है, उसे उस वर्ष की सबसे बेहतर पैदावार का संकेत माना जाता है।

इसी परंपरा के तहत घरों में सभी अनाज मिलाकर कूटे जाते हैं और खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। यह परंपरा किसानों के जीवन में आस्था और कृषि विज्ञान का अनोखा संगम प्रस्तुत करती है।

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