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गिरावड़ी धाम पर बढ़ता श्रद्धालुओं का दबाव, महंत ने प्रशासन से मांगी सुरक्षा, श्रद्धालुओं को जंगली जानवरों से रहता है खतरा


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गिरावड़ी धाम पर बढ़ता श्रद्धालुओं का दबाव, महंत ने प्रशासन से मांगी सुरक्षा, श्रद्धालुओं को जंगली जानवरों से रहता है खतरा

गिरावड़ी धाम में जहाँ विज्ञान की सीमा खत्म होती है, वहां से शुरू होता है 'सूरदास बाबा' का चमत्कार, "श्रद्धालुओं का एलर्जी, कैंसर, घठिया, पथरी, गांठ एवं आंखों की रोशनी जैसी गंभीर बीमारियों में राहत का दवा"

उदयपुरवाटी : राजस्थान के रेतीले धोरों के बीच अरावली की पहाड़ियों के मध्य स्थित ‘गिरावड़ी सूरदास धाम’ उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बन चुका है, जिन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने जवाब दे दिया था। विधानसभा क्षेत्र की बागोरा ग्राम पंचायत के इस छोटे से गांव गिरावड़ी में आस्था का ऐसा जन-सैलाब उमड़ रहा है कि मंगलवार, शनिवार और गुरुवार को यहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं बचती।

कैंसर से लेकर एलर्जी तक एक ‘झाड़े’ से मिल रही है असाध्य रोगों से राहत
समाधि के महंत प्रकाश महाराज के पास आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि बाबा के ‘चिमटे का झाड़ा’ असाध्य रोगों को जड़ से मिटा देता है। यहाँ आने वाले भक्तों के अनुसार असाध्य रोग कैंसर, पुरानी एलर्जी, गठिया बाय, रिंगण बाय, पथरी, गांठ और आंखों की रोशनी जाने, फोड़ा-फुनसी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लाखों लोग यहाँ से ठीक होकर जा चुके हैं। जहाँ लोग इसे अंधविश्वास की नजर से देखते हैं, वहीं ठीक होने वाले मरीज कहते हैं कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर की महंगी दवाओं से जो आराम नहीं मिला, वो यहाँ की भभूति ने कर दिखाया है।

मध्य रात्रि से ही गूंजते हैं बाबा सूरदास मूलाराम के जयकारे
राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु एक दिन पहले ही धाम पहुँच जाते हैं। घने जंगलों के बीच स्थित इस समाधि पर मंगलवार, शनिवार और गुरुवार की मध्य रात्रि से ही कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। भक्त लोकेश कुमार और दीपक कुमार ने बताया कि बाबा की शक्ति का ही प्रभाव है जो लोग खिंचे चले आते हैं। श्री सूरदास सेवा समिति गिरावड़ी धाम ने श्रद्धालुओं को हिदायत दी है कि समाधि स्थल घने जंगल में स्थित है। इसलिए निर्धारित दिन को सुबह 7बजे से 3बजे तक ही मंगलवार, शनिवार, गुरुवार के अलावा अन्य दिनों में यहाँ रात्रि में कोई भी श्रद्धालु विश्राम न करें, क्योंकि जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। किसी भी अनहोनी के लिए समिति जिम्मेदार नहीं होगी। मंगलवार, शनिवार, गुरुवार को समाधि पर आने वाले बीमारी से पीड़ित श्रद्धालुओं को पवित्र भभूति, तांती और चिमटे का झाड़ा दिया जाता है। समाधि स्थल पर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब व दिल्ली से अन्य राज्य से भी हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालु राधा देवी ने कहा कि “अंधविश्वास छोड़ो, संत बाबा सूरदास समाधि से विश्वास जोड़ो।” लेकिन निश्चित समय एवं वार के अनुसार ही समाधि स्थल पर आवें। किसी श्रद्धालु के आराम नहीं आने पर समाधि स्थल पर अनावश्यक रूप से भीड़ नहीं करें। पीड़ित श्रद्धालु के साथ आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन तथा मंदिर परिसर के बाहर खाली एरिया में ही विश्राम करें। मंदिर परिसर में केवल बीमार श्रद्धालुओं के आने की अनुमति है।

महंत की स्पष्ट चेतावनी “आराम मिले तो ही आएं, अनावश्यक भीड़ न करें”
महंत प्रकाश महाराज ने स्पष्टता और ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए कहा कि “हमारा लक्ष्य निस्वार्थ सेवा है। यहाँ कोई आर्थिक प्रलोभन नहीं लिया जाता। यदि श्रद्धालु को पहली या दूसरी बार आने पर आराम महसूस हो, तभी वह तीसरी बार आएं। प्रशासन को भी हमने सूचित किया है कि भीड़ को नियंत्रित करना अब एक चुनौती बन गया है।

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