सिंघानिया विश्वविद्यालय में संस्थापक स्व. डी.सी. सिंघानिया की प्रतिमा का भव्य अनावरण
सिंघानिया विश्वविद्यालय में संस्थापक स्व. डी.सी. सिंघानिया की प्रतिमा का भव्य अनावरण
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अयुब खान
पचेरी कलाँ : सिंघानिया विश्वविद्यालय में संस्थापक स्वर्गीय डी.सी. सिंघानिया की प्रतिमा का भव्य अनावरण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत एवं तिलक के साथ हुआ, जिसने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक आभा प्रदान की।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हरि खेमका उपस्थित रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथियों में प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल, डॉ. महा सिंह राव एवं डॉ. दिलीप मोदी शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के चेयरमैन रवि सिंघानिया ने की।
इस दौरान मुख्य अतिथि हरि खेमका एवं चेयरमैन रवि सिंघानिया के करकमलों द्वारा स्व. डी.सी. सिंघानिया की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति संदेश का प्रतीक रहा।

इसी अवसर पर संस्थान के लिए 5 नई बसों का उद्घाटन कर उन्हें विद्यार्थियों को समर्पित किया गया, जिससे परिवहन सुविधाओं में और सुधार होगा। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुई, वहीं संस्थान के कुलगीत ने पूरे वातावरण को गौरवपूर्ण बना दिया।
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि चेयरमैन रवि सिंघानिया निरंतर संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के प्रयास कर रहे हैं और शेखावाटी क्षेत्र से जुड़ाव को मजबूत बना रहे हैं।

प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल ने स्व. डी.सी. सिंघानिया को एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनकी सोच अपने समय से आगे थी। वहीं डॉ. दिलीप मोदी ने कहा कि उन्होंने बंजर भूमि पर शिक्षा का विशाल संस्थान स्थापित कर एक मिसाल पेश की, जिसे आज उनके पुत्र रवि सिंघानिया आगे बढ़ा रहे हैं।
डॉ. महा सिंह राव ने कहा कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ खेलों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है और उन्होंने खेल विकास में सहयोग देने का आश्वासन दिया।

मुख्य अतिथि हरि खेमका ने इसे “विरासत का उत्सव” बताते हुए कहा कि रवि सिंघानिया अपने पिता की विरासत के सच्चे संवाहक हैं और उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं।
अपने संबोधन में चेयरमैन रवि सिंघानिया ने इसे भावनात्मक क्षण बताते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी जीना चाहिए। उन्होंने संस्थान के भविष्य के लिए शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य-इन तीन प्रमुख स्तंभों पर कार्य करने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का मंच संचालन प्रबंधक उपकुलपति (पीवीसी) डॉ. पवन त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में पदक विजेता विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही प्रतिमा निर्माण करने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार मातूराम को भी सम्मानित किया गया।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को जीवंत और यादगार बना दिया। कार्यक्रम में शेखावाटी क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, संस्थान के स्टाफ, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अंत में समूह फोटो एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन स्व. डी.सी. सिंघानिया को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा, जिनकी प्रेरणा आज भी शिक्षा जगत को नई दिशा दे रही है।

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