चांद नजर आते ही ईद का ऐलान मरकजी ईदगाह में सुबह 8:00 बजे होगी ईद की नमाज
नन्हे मुन्ने बच्चों ने देखा ईद का चांद एक दूसरे को गले लगा कर दी मुबारक बाद
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर ईद का चांद नजर आते ही खुशियों का त्यौहार जो माहे रमजान के 30 रोजे के बाद एक तोहफे के रूप में खुशियां लेकर आता है। ईद के चांद को देखने के लिए महिलाएं और बच्चे मकान की छतों पर नजर आते हैं। वहीं पर मस्जिदों में मगरिब की नमाज के बाद पुरुष ईद का चांद देखते हैं और एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। मुस्लिम मोहल्ले में चांद देखने के बाद काफी चहल-पहल नजर आती है और सभी ईद की तैयारीयों में लग जाते हैं। ईद का चांद देखना भी धार्मिक महत्वःहै, ईद-उल-फितर का चांद दिखना रमजान के पवित्र महीने के समापन और शव्वाल महीने की शुरुआत का प्रतीक है। इसे देखना खुशी और इबादत के सफल समापन का संकेत माना जाता है।
जैसे ही चांद नजर आता है तो दुआ पढ़ी जाती है चांद देखने की दुआः चांद दिखने पर पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा बताई गई दुआ पढ़ना सुन्नत है: “अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिल-अम्नी वल-ईमानी वस-सलामति वल-इस्लामि रब्बी व रब्बुकल्लाह”। इसका अर्थ है,( “ऐ अल्लाह, इस चांद को हमारे लिए अमन, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ उदय कर। मेरा और तेरा रब अल्लाह है”) इस रात को ‘चांद रात’ कहा जाता है, जो दक्षिण एशियाई संस्कृति में विशेष महत्व रखती है। लोग बाजारों में खरीदारी करते हैं, मेहंदी लगवाते हैं और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।
वैज्ञानिक और भौगोलिक पहलूः चांद की दृश्यता भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। अक्सर सऊदी अरब में चांद भारत से एक दिन पहले नजर आता है, जिसके कारण वहां ईद पहले मनाई जाती है। और हमारे भारत देश में दूसरे दिन ईद होती है। ईद के दिन सभी मुस्लिम समुदाय के लोग निर्धारित समय पर ईद का पहुंचकर ईद की नमाज अदा करते हैं और एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद देते हैं।और भाई चारा अमन चैन की दुआएं करते हैं।
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