ईद-उल-फ़ित्रः त्यौहार – त्याग, सौहार्द और सामाजिक सद्भाव का पर्व – शहर इमाम- सैयद मोहम्मद अनवार नदीम-उल-कादरी
चांद दिखने के साथ ही ईद की नमाज़ की घोषणा और ईद- मुबारक एवं अमन चैन शांति तरक्की की दुआएं की -शहर इमाम
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर शहर इमाम सैयद मोहम्मद अनवार नदीम- उल- कादरी ने चांद दिखने पर शहर एवं देशवासियों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा ईद-उल-फित्र इस्लाम के दो त्यौहारों में से एक है। यह रमज़ान के महीने के समापन का प्रतीक है, जो आत्म-संयम, ईश-परायणता और आत्म-विश्लेषण का समय होता है। लेकिन ईद सिर्फ खुशी और उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह एक महीने के उस आध्यात्मिक और नैतिक प्रशिक्षण का नतीजा है जो मुसलमानों को संयम, धैर्य, कृतज्ञता और सामाजिक ज़िम्मेदारी सिखाता है। रमज़ान के दौरान सीखे गए आत्म-अनुशासन, हमदर्दी और दानशीलता के सबक़ ईद के मौके पर व्यवहार में ढलते हैं। यह दिन आपसी एकता को मज़बूत करने, सामाजिक न्याय को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और आपसी सौहार्द को परवान चढ़ाने का अवसर भी होता है। भारत, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है।

ईद-उल-फित्र हमेशा से एकता, धार्मिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक रही है। दुर्भाग्य से हाल के वर्षों में बढ़ती राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों ने इसके मूल संदेश को प्रभावित करने की कोशिश की है। ईदगाहों में नमाज़ पर पाबंदियां, मस्जिदों की अन्यायपूर्ण और मनमानी तोड़फोड़, आर्थिक बहिष्कार, नफ़रत भरी बयानबाज़ी और मीडिया का पक्षपात पूर्ण रवैया इस त्यौहार की समावेशी भावना के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। इसके बावजूद, ईद एकता और सौहार्द का प्रतीक बनी हुई है। यह इस बात का प्रमाण है कि समाज आपसी भाईचारे और सह-अस्तित्व के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता बनाए रखे हुए है।
भारत में ईदः एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव है।भारत में ईद-उल-फित्र केवल एक धार्मिक त्यौहार नहीं, बल्कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ईद से पहले मस्जिदों – घरों में और बाजारों में लाइटिंग की सजावटे होती हैं । ईद की ख़रीदारी और तरह-तरह के खाने-पीने की रौनक़ देखने लायक़ होती है। इस दिन परिवारों में विशेष दावतें होती हैं, जिनमें शीर खुरमा, सेवइयां, बिरयानी, कवाब और कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं। बच्चों को ईदी (नक़दी या तोहफ़े) दी जाती है और लोग एक-दूसरे से मिलकर बधाइयां देते हैं। ईद की यह ख़ुशी सिर्फ़ मुस्लिम घरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई गैर-मुस्लिम दोस्त और पड़ौसी भी इसमें शामिल होते हैं, जिससे भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सौहार्द और मज़बूत होता है। रमज़ानः एक महीने का आत्मिक प्रशिक्षण है ।ईद-उल-फित्र को पूरी तरह समझने के लिए, रमज़ान के आध्यात्मिक सफ़र को समझना ज़रूरी है।
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