कलेक्टर, ADM और आयुक्त हुए उपभोक्ता आयोग में पेश:6 करोड़ के चेक जमा, प्रशासन ने माना, हमें नहीं थी प्रकरण की गंभीरता की जानकारी, अब 500 फ्लैट जल्द सौंपने का वादा
कलेक्टर, ADM और आयुक्त हुए उपभोक्ता आयोग में पेश:6 करोड़ के चेक जमा, प्रशासन ने माना, हमें नहीं थी प्रकरण की गंभीरता की जानकारी, अब 500 फ्लैट जल्द सौंपने का वादा
झुंझुनूं : मुख्यमंत्री जन आवास योजना के 1536 लाभार्थियों को न्याय दिलाने के लिए झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। आयोग द्वारा व्यक्तिगत रूप से तलब किए जाने बाद जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी खुद जिला उपभोक्ता आयोग के सामने पेश हुए।
उपभोक्ता आयोग के सख्त आदेशों के बाद जिला कलेक्टर अरुण गर्ग, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) अजय आर्य, नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचलिया, SDM कौशल्या विश्नोई, तत्कालीन SDM हवाई सिंह यादव, तहसीलदार महेंद्र मूंड आयोग के समक्ष पेश हुए। आयोग के अध्यक्ष मनोज मील ने सभी अधिकारियों पेश होने के लिए समन जारी किए थे। नगर परिषद जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग में अपील की थी। लेकिन राष्ट्रीय आयोग और राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को सही माना था। इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाया।

नगर परिषद ने जमा कराए 6 करोड़, 500 फ्लैट्स का दिया भरोसा कोर्ट की सख्ती का असर यह हुआ कि वर्षों से लंबित मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई। नगर परिषद ने उपभोक्ताओं के बकाया और मुआवजे के भुगतान के लिए 6 करोड़ रुपये के चेक आयोग में जमा करवाए। जिला प्रशासन और नगर परिषद ने संयुक्त रूप से आश्वासन दिया कि 500 फ्लैट्स का काम युद्ध स्तर पर पूरा कर जल्द ही उपभोक्ताओं को कब्जा सौंप दिया जाएगा। उपभोक्ता आयोग के हर निर्देश की शत-प्रतिशत पालना की जाएगी। नगर परिषद आयुक्त ने इस मामले हेल्प डेस्क स्थापित करने की बात भी कहीं।
धारा 72 का खौफ, जेल और जुर्माने की थी तैयारी
अधिकारियों की इस सक्रियता के पीछे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 का डर भी था। इस धारा के तहत न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने पर दोषी अधिकारी को 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। आयोग ने इसे ‘न्यायिक अवज्ञा’ मानते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया था।

यह था पूरा विवाद
यह मामला मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन आवास योजना से जुड़ा है। 1536 लाभार्थियों को न तो घर मिले और न ही पैसा। पूर्व में अवार्ड राशि वसूलने के लिए खसरा नंबर 1691 की भूमि कुर्क की गई थी। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम ने बिना आयोग की अनुमति के कुर्क जमीन को मुक्त कर दिया और नगर परिषद ने इस जमीन के टुकड़ों को खुली बोली लगाकर बेच दिया। जमीन बेचने से आए करोड़ों रुपये न तो पीड़ितों को दिए गए और न ही कोर्ट में जमा कराए गए, जिससे आयोग बेहद नाराज था।
इन अधिकारियों को किया था तलब
आयोग ने कलेक्टर अरुण गर्ग, ADM अजय आर्य, कमिश्नर देवीलाल बोचलिया के साथ-साथ तत्कालीन SDM हवाई सिंह यादव, वर्तमान SDM कौशल्या विश्नोई और तहसीलदार महेंद्र मूंड को इस पूरी प्रक्रिया में जवाबदेह माना है।
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