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शीतला माता मंदिर में मेला लगा:ठंडे पकवानों का भोग लगाया, घर-घर बनी ईसर-गणगौर प्रतिमाएं


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शीतला माता मंदिर में मेला लगा:ठंडे पकवानों का भोग लगाया, घर-घर बनी ईसर-गणगौर प्रतिमाएं

शीतला माता मंदिर में मेला लगा:ठंडे पकवानों का भोग लगाया, घर-घर बनी ईसर-गणगौर प्रतिमाएं

लक्ष्मणगढ़ : चैत्र कृष्ण अष्टमी पर बुधवार को लोकपर्व बास्योड़ा श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर उपखंड मुख्यालय स्थित शीतला माता मंदिर में एक विशाल मेले का आयोजन किया गया, जहां कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों महिला-पुरुषों ने पहुंचकर माता को धोक लगाई। घरों में भी लोगों ने शीतला माता को राबड़ी, रोटी और विभिन्न ठंडे पकवानों का भोग लगाया।

ईसर-गणगौर की प्रतिमाओं का निर्माण किया

बास्योड़ा को सौभाग्य और सुहाग के सोलह दिवसीय गणगौर पर्व का मध्यांतर भी माना जाता है। इस दिन महिलाओं ने मंगलगीत गाते हुए कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर शुभ मुहूर्त में ईसर-गणगौर की प्रतिमाओं का निर्माण किया। शिव-पार्वती स्वरूप मानी जाने वाली इन प्रतिमाओं को घरों में विधि-विधान से तैयार किया गया। अगले आठ दिनों तक इनका रोजाना पूजन किया जाएगा और सुबह-शाम बिंदोरा निकालने की परंपरा निभाई जाएगी।

महिलाएं पूजा की थाली सजाकर, मिट्टी के नौ कंडवारों में ठंडे पकवान और करवे में ठंडा पानी लेकर गीत गाती हुई शीतला माता मंदिर पहुंचीं। यहां माता को दही-राबड़ी, रोटी, पूड़ी, पूए, चावल और पंचकुट्टे की सब्जी जैसे विभिन्न ठंडे पकवानों का भोग लगाया गया। घरों में भी शीतला माता को ठंडे पकवानों से प्रसन्न करने की परंपरा का निर्वहन किया गया।

कुमावत समाज के लोगों को श्रद्धापूर्वक ठंडे पकवान भेंट करती हुई महिलाएं।
कुमावत समाज के लोगों को श्रद्धापूर्वक ठंडे पकवान भेंट करती हुई महिलाएं।

आधी रात से लगने लगी कतारें

मंगलवार आधी रात के बाद से ही मंदिर में माता के दर्शन के लिए महिलाओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं, जो बुधवार दोपहर तक जारी रहीं। श्रद्धालुओं ने नंगे पांव मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन और पूजन किए। मंदिर परिसर में लगे मेले में स्थानीय लोक कलाकारों ने चंग और ढप की थाप पर पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत बना दिया।

इससे पहले, मंगलवार रात्रि को मंदिर में एक भव्य जागरण का आयोजन किया गया। इसमें चुवास आश्रम के संत निश्चल नाथ महाराज, संगीत गुरु जयकांत खरादी, गायक विनय तमोली, प्रदीप पारीक और राधाकृष्ण पाराशर सहित कई कलाकारों ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

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