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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अनोखी पहल: दुल्हन बनने जा रही अंकिता की घोड़ी पर निकाली बनोरी


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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अनोखी पहल: दुल्हन बनने जा रही अंकिता की घोड़ी पर निकाली बनोरी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अनोखी पहल: दुल्हन बनने जा रही अंकिता की घोड़ी पर निकाली बनोरी

सिंघाना : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया, जब सिंघाना के निकट तातीजा गांव में दुल्हन बनने जा रही अंकिता भाडोरिया की शादी से पहले घोड़ी पर बिठाकर बनोरी निकाली गई। यह पहल समाज में महिलाओं के सम्मान और समानता का संदेश देने वाली मानी जा रही है।

तातीजा गांव के सेवानिवृत्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के हवलदार ओमप्रकाश भाडोरिया की बेटी तथा स्वास्थ्य विभाग में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में कार्यरत अंकिता भाडोरिया की शादी 11 मार्च 2026 को होने जा रही है। शादी से पूर्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्हें घोड़ी पर बिठाकर बनोरी निकाली गई। यह अनूठी पहल अंकिता के चाचा अरविंद कुमार भाडोरिया, जो सशस्त्र सीमा बल में हवलदार पद पर कार्यरत हैं, द्वारा की गई।

इस पहल को लोगों ने सराहते हुए समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले फाउंडेशन नारनौल की कोषाध्यक्ष अंजना देवी ने बताया कि यह कदम समाज में महिलाओं के प्रति दकियानूसी सोच को तोड़ने और बेटियों को सम्मान देने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब महिलाओं को शिक्षा से भी वंचित रखा जाता था, लेकिन महापुरुषों के संघर्ष और सामाजिक सुधार आंदोलनों के कारण आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। अंकिता भाडोरिया भी स्वास्थ्य विभाग में कार्य करते हुए समाज की सेवा कर रही हैं, जो इस बदलाव का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान अंकिता के दादा सुनेहरी लाल ने कहा कि समाज को पुराने रूढ़िवादी विचारों को छोड़कर नए प्रगतिशील विचार अपनाने होंगे। इससे महिलाओं का आत्मसम्मान बढ़ेगा और समाज में समानता की भावना मजबूत होगी।

इस अवसर पर मंजू देवी, सुमन देवी, विमला देवी, गीता, शशि, सुमन सहित गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। सभी ने इस अनोखी बनोरी की सराहना करते हुए इसे महिला सम्मान और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अनुरूप सकारात्मक पहल बताया।

कार्यक्रम की जानकारी सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले फाउंडेशन के प्रधान कामरेड सुभाष चंद्र अधिवक्ता द्वारा दी गई। यह पहल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

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