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गोचर भूमि बेचने का आरोप, संत समाज में विरोध:विधायक बोले- गौ माता की जमीन को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के हवाले नहीं होने दिया जाएगा


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गोचर भूमि बेचने का आरोप, संत समाज में विरोध:विधायक बोले- गौ माता की जमीन को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के हवाले नहीं होने दिया जाएगा

गोचर भूमि बेचने का आरोप, संत समाज में विरोध:विधायक बोले- गौ माता की जमीन को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के हवाले नहीं होने दिया जाएगा

फतेहपुर : गोचर भूमि की कथित बिक्री के विरोध में रविवार को ‘गोचर बचाओ संत हुंकार महासभा’ का आयोजन किया गया। इस महासभा में संत-महंतों, गौभक्तों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर गोचर भूमि की बिक्री का कड़ा विरोध जताया। संत समाज ने चेतावनी दी है कि गौ माता के लिए छोड़ी गई इस भूमि को भूमाफियाओं के हवाले नहीं होने दिया जाएगा।

महासभा का आयोजन नाथ सम्प्रदाय के अमृतनाथ आश्रम के पीठाधीश्वर नरहरिनाथ महाराज के नेतृत्व में हुआ। वक्ताओं ने इस दौरान कहा कि गोचर भूमि समाज की धरोहर है और इसे बेचने का कोई भी प्रयास धार्मिक तथा सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा।

साधु-संत बलिदान देने को तैयार

बुधगिरी मढ़ी के पीठाधीश्वर दिनेशगिरी महाराज ने बताया कि उनके पास चार ऐसे साधु-संत हैं जो शपथ पत्र देकर गोचर भूमि की रक्षा के लिए बलिदान देने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत समाज गौ माता की जमीन की रक्षा हेतु हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

सभा में उपस्थित विधायक हाकम अली ने प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि इस मामले में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी सरकार होती तो ऐसे अधिकारियों को अब तक निलंबित कर दिया गया होता। विधायक ने दोहराया कि गौ माता की जमीन को किसी भी कीमत पर भू-माफियाओं के हवाले नहीं होने दिया जाएगा।

यह है पूरा मामला

दरअसल, यह विवादित भूमि मूल रूप से कसेरा परिवार द्वारा फतेहपुर पिंजरापोल सोसायटी को दान में दी गई थी। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी यह जमीन पिंजरापोल सोसायटी के नाम दर्ज नहीं हो पाई और कागजों में मैना देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर ही बनी रही। आरोप है कि ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने करीब 800 बीघा इस जमीन को 20 से अधिक व्यक्तियों को बेच दिया है।

जमीन की बिक्री को तत्काल निरस्त करने की मांग

इस मामले के सामने आने के बाद संत समाज और गौभक्तों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। संतों ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन की बिक्री को तत्काल निरस्त किया जाए और गोचर भूमि को पिंजरापोल सोसायटी के नाम दर्ज किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो संत समाज एक बड़ा आंदोलन करेगा।

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