नीमकाथाना में 23 घंटे बाद लेपर्ड का रेस्क्यू:वन विभाग की टीम पर किया हमले की कोशिश, जयपुर से पहुंची टीम ने किया ट्रेंकुलाइज
नीमकाथाना में 23 घंटे बाद लेपर्ड का रेस्क्यू:वन विभाग की टीम पर किया हमले की कोशिश, जयपुर से पहुंची टीम ने किया ट्रेंकुलाइज
नीमकाथाना : सीकर जिले के नीमकाथाना में एक दिन बाद लेपर्ड का वन विभाग ने रेस्क्यू कर लिया है। शुक्रवार दोपहर महावा गांव की दुर्गा वाली ढाणी में लेपर्ड आ गया था। इसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जब लेपर्ड को रेस्क्यू करने की कोशिश की तो वह कंटीली झाड़ियों में छिप गया। शनिवार को जब लेपर्ड को रेस्क्यू करने की कोशिश की तो उसने वन कर्मियों पर हमला करने की कोशिश की। इसके बाद लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज किया गया।
क्षेत्रीय वन अधिकारी जोगेंद्र सिंह ने बताया-शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे सूचना मिली कि नीमकाथाना की दुर्गा वाली ढाणी में पुरानमल शर्मा के मकान के पीछे एक लेपर्ड दिखाई दिया है। 3 बजे टीम महावा गांव की दुर्गा वाली ढाणी पहुंची। इस दौरान लेपर्ड ढाणी में स्थित एक खेत में छिपा हुआ था। टीम ने जब उसे रेस्क्यू करने की कोशिश की तो कंटीली झाड़ियों में घुस गया।


शुक्रवार को अंधेरा होने पर रोका रेस्क्यू ऑपरेशन
शाम 5:30 बजे सीकर से वन विभाग के उड़नदस्ता प्रभारी हरलाल जाट भी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। मगर अंधेरा हो जाने की वजह से लेपर्ड का रेस्क्यू नहीं किया जा सका। पूरा रात टीम लेपर्ड के मूवमेंट पर नजर रखती रही। जोगेंद्र सिंह ने बताया-शनिवार सुबह मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस दौरान झाड़ियों से निकलकर फिर खेतों में भाग गया। जहां दहाड़ लगाते हुए इधर से उधर चक्कर लगाता रहा। इसके बाद वापस कंटीली झाड़ियों में घुस गया।
जयपुर चिड़ियाघर से पहुंचे डॉ.अशोक कुमार ने किया ट्रेंकुलाइज
दोपहर 12 बजे जयपुर के चिड़ियाघर की रेस्स्यू की टीम के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार मौके पर पहुंचे और खेत में पिंजरा लगाकर रेस्क्यू की तैयारी शुरू की। जब टीम ने लेपर्ड को पकड़ने की कोशिश की तो उसने वनकर्मियों पर अटैक करने की कोशिश की। इस पर वनकर्मी जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए। दोपहर 1:30 बजे डॉक्टर अशोक कुमार ने लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज करने में सफलता हासिल की।


इलाज के लिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा जाएगा
डॉ. अशोक कुमार ने बताया-पहले बिना टेंकुलाइज किए रेस्क्यू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन लेपर्ड लगातार अटैक कर रहा था। हल्की डोज देकर उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद पता चला कि यह करीब ढाई साल की मादा लेपर्ड है और इसमें न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जिसकी वजह से वह बीमार लग रही है। लेपर्ड को इलाज के लिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा, जहां उसका इलाज किया जाएगा। ठीक होने के बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा।
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