बच्चों में होम-बेस्ड पेरिटोनियल डायलिसिस पर जोर
किडनी रोगों की रोकथाम के लिए शुरुआती स्क्रीनिंग जरूरी : डॉ. निशा गौड़
जनमानस शेखावाटी संवाददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : तेजी से बढ़ रहे किडनी रोगों के बीच इलाज की आधुनिक तकनीकों ने मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है। बच्चों में किडनी फेल्योर के उपचार को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए होम-बेस्ड पेरिटोनियल डायलिसिस को प्राथमिकता दी जा रही है। यह जानकारी इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर की सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. निशा गौड़ ने प्रेस वार्ता में दी।
डॉ. निशा गौड़ ने बताया कि पेरिटोनियल डायलिसिस बच्चों के लिए एक प्रभावी और सुविधाजनक उपचार है, जिसे प्रशिक्षित अभिभावक घर पर ही सुरक्षित रूप से कर सकते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद और सामान्य जीवन कम प्रभावित होता है। कई मामलों में रात के समय मशीन के माध्यम से डायलिसिस किया जाता है, जिससे बच्चा सोते-सोते उपचार ले लेता है। बार-बार अस्पताल जाने की आवश्यकता कम होने से परिवार को मानसिक और आर्थिक राहत भी मिलती है।
उन्होंने कहा कि क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की रोकथाम के लिए डायबिटीज और उच्च रक्तचाप की समय पर स्क्रीनिंग अत्यंत आवश्यक है। डायबिटीज के 30 से 40 प्रतिशत मरीजों में आगे चलकर किडनी संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। ऐसे में नियमित ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और यूरिन जांच से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।
डॉ. गौड़ के अनुसार संतुलित आहार, कम नमक का सेवन, नियमित व्यायाम और समय पर दवाइयों से किडनी रोग की प्रगति को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान से कई मरीजों को डायलिसिस की स्थिति तक पहुंचने से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, आधुनिक उपचार तकनीकों और जागरूकता के माध्यम से किडनी रोगियों का जीवन बेहतर और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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