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रामगढ़ में तीन दिन बाद लेपर्ड का रेस्क्यू:70 किलोमीटर तक पैदल पगमार्क को किया फॉलो, खेत में जाकर हुआ बेहोश


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रामगढ़ में तीन दिन बाद लेपर्ड का रेस्क्यू:70 किलोमीटर तक पैदल पगमार्क को किया फॉलो, खेत में जाकर हुआ बेहोश

रामगढ़ में तीन दिन बाद लेपर्ड का रेस्क्यू:70 किलोमीटर तक पैदल पगमार्क को किया फॉलो, खेत में जाकर हुआ बेहोश

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : नैना शेखावत

रामगढ़ : सीकर जिले के रामगढ़ में तीन दिन बाद वन विभाग की टीम ने लेपर्ड को रेस्क्यू किया। मंगलवार शाम 4 बजे टीम ने फतेहपुर-रतनगढ़ बॉर्डर स्थित खुदेरा गांव की रोही में एक सरसों के खेत से लेपर्ड को रेस्क्यू कर लिया।ट्रेंक्यूलाइज करने के बाद लेपर्ड भागता हुए सरसों के खेत में घुस गया और वहां बेहोश हो गया।

10 जनवरी को मकान में घुस गया था लेपर्ड

वन विभाग के अधिकारी नरेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया- शनिवार रात को सूचना मिली कि रामगढ़ शहर से निकल रहे है जयपुर-चूरू हाईवे के पास स्थित एक मकान में लेपर्ड घुस गया है। इस दौरान लोग मौके इकट्ठा हो गए। भीड़ को देखकर लेपर्ड मौके से भाग गया। इस दौरान वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और लेपर्ड को ट्रेस करना शुरू किया।

शनिवार रात को ही लेपर्ड ने एक कुत्ता और एक बछड़े का शिकार कर लिया। इसके बाद टीम ने ट्रेस करते हुए रविवार को उसकी लोकेशन रामगढ़ के पास स्थित बीहड़ के पास स्थित एक सरसों के खेत में मिली। इस पर टीम ने मौके पर पिंजरा लगाया। मगर लेपर्ड वहां से भी आगे निकल गया।

वन विभाग ने ड्रोन के जरिए की निगरानी

टीम ने ड्रोन के जरिए निगरानी शुरू की। सोमवार को बीहड़ से 10 किलोमीटर आगे रतनगढ़ की ओर एक सरसों के खेत में फिर से लेपर्ड की लोकेशन मिली। वहां भी विभाग ने एक पिंजरा लगाया। मगर यहां सफलता नहीं मिली।

13 जनवरी को किया रेस्क्यू

मंगलवार दोपहर को लेपर्ड फतेहपुर-रतनगढ़ बॉर्डर स्थित खुदेरा गांव की रोही में एक सरसों के खेत के पास दिखाई दिया। इस पर टीम मौके पर पहुंची और जयपुर वन विभाग के डॉक्टर अशोक तंवर ने उसे ट्रेंक्यूलाइज कर लिया।इसके बाद लेपर्ड भागते हुए सरसों के खेत में घुस गया और अंदर जाकर बेहोश हो गया। टीम लेपर्ड को रेस्क्यू कर चूरू लेकर आई है। जहां मेडिकल के बाद रेंज के अधिकारी तय करेंगे कि उसे कहां छोड़ा जाए।

70 किलोमीटर तक पगमार्क का किया पीछा

नरेंद्र सिंह ने बताया- वन विभाग के दो वनरक्षक दयाल सिंह और आकिल हुसैन ने इस रेस्क्यू मे अहम भूमिका निभाई है। दोनों ने तीन दिन तक लगभग 70 किलोमीटर पैदल पगमार्क को ट्रेस किया। इसकी वजह सफल रेस्क्यू हो सका। इस दौरान रेंजर नरेंद्र सिंह, लक्ष्मणगढ़ रेंजर दुर्गा हुड्डा, चूरू रेंजर पवन शर्मा, वनपाल सुरेश कुमार की अहम भूमिका रही।

तस्वीरों में देखिए लेपर्ड का रेस्क्यू…

जयपुर वन विभाग के डॉक्टर अशोक तंवर ने जैसे ही लेपर्ड को ट्रेंक्यूलाइज किया तो वह भागने लगा।
जयपुर वन विभाग के डॉक्टर अशोक तंवर ने जैसे ही लेपर्ड को ट्रेंक्यूलाइज किया तो वह भागने लगा।
लेपर्ड भागते हुए सरसों के खेत में घुस गया।
लेपर्ड भागते हुए सरसों के खेत में घुस गया।
खेत के बीच में जाकर एक जगह लेपर्ड बेहोश हो गया।
खेत के बीच में जाकर एक जगह लेपर्ड बेहोश हो गया।
वन विभाग ने लेपर्ड को रेस्क्यू कर चूरू भेज दिया।
वन विभाग ने लेपर्ड को रेस्क्यू कर चूरू भेज दिया।

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