केंद्र सरकार सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बंद करे : सांसद बृजेंद्र सिंह ओला
केंद्र सरकार सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण बंद करे : सांसद बृजेंद्र सिंह ओला
नई दिल्ली/झुंझुनूं : झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से भारी उद्योग क्षेत्र में रोजगार सृजन और सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर गंभीर प्रश्न उठाए। सांसद ओला ने कहा कि केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के भारी उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से निजी हाथों में सौंपने का प्रयास कर रही है, जबकि संसद और जनता के सामने पूरी जानकारी नहीं रखी जा रही। उन्होंने बताया कि भारी उद्योग मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसके पास न तो रोजगार सृजन का केंद्रीकृत डेटा है और न ही निवेश से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार बिना अध्ययन और बिना प्रभाव मूल्यांकन के नीतियां लागू कर रही है।
इन उपक्रमों के निजीकरण को मिली है सैद्धांतिक मंजूरी
सांसद ने बताया कि CCEA पहले ही कई CPSUs के निजीकरण/विनिवेश को मंजूरी दे चुका है-
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ब्रिज एंड रूफ कंपनी (B&R)
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सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI)
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इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड (EPIL)
ओला ने सवाल उठाया कि जब मंत्रालय के पास रोजगार, निवेश और औद्योगिक प्रभाव से जुड़ा पूरा डेटा ही उपलब्ध नहीं है, तो बिना पारदर्शिता और बिना विस्तृत अध्ययन के विनिवेश प्रक्रिया क्यों चलाई जा रही है?
संसद समीक्षा की मांग
सांसद ओला ने भारी उद्योगों में चल रही पूरी विनिवेश/निजीकरण प्रक्रिया—विशेषकर 2016 से अब तक दी गई सभी सैद्धांतिक स्वीकृतियों—की संसद द्वारा विस्तृत समीक्षा कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण तत्काल रोका जाए, ताकि देश में रोजगार, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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