कानून की प्रतियां जलाईं, लेबर कोड्स के खिलाफ गरजे मेडिकल व सेल्स रिप्रेज़ेंटेटिव्स
झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन - बोले, नया लेबर कोड गैर-संवैधानिक, SPEs के अधिकार खत्म किए
झुंझुनूं : नए लेबर कोड्स के विरोध में सोमवार को राजस्थान मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेज़ेंटेटिव्स यूनियन के सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चारों लेबर कोड्स को मजदूर-विरोधी बताते हुए यूनियन कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
यूनियन प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉयज (SPEs) के लिए बने SPE (कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, 1976 को समाप्त करने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए। यूनियन का कहना है कि 21 नवंबर 2025 से लागू हुए लेबर कोड्स के कारण देशभर के लाखों SPEs असुरक्षित स्थिति में पहुंच गए हैं।

“विशेष कानून खत्म कर OSH कोड में मिलाना गैर-संवैधानिक”
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी परामर्श और बिना स्टेकहोल्डर्स से चर्चा किए SPE एक्ट को खत्म कर इसे OSH कोड में मिला दिया है। यह कदम पूरी तरह असंवैधानिक और कंपनियों के हित में बताया गया।
यूनियन नेताओं ने कहा कि SPE एक्ट 1976 संसद में बहस और विस्तृत जांच के बाद लागू किया गया था, जिसमें SPEs के कार्यस्थल, सुरक्षा, सर्विस कंडीशंस और अधिकारों की स्पष्ट रूप से रक्षा की गई थी। लेकिन नए लेबर कोड्स में SPEs के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं है, जिससे कंपनियों की मनमानी और शोषण बढ़ने की आशंका है।
“कंपनियां पहले ही दबाव में रखती हैं, अब नियंत्रण भी खत्म”
झुंझुनूं यूनिट के सचिव रमेश झाझड़िया ने बताया कि SPEs पर पहले ही टारगेट का दबाव, मनमानी ट्रांसफर और असुरक्षित यात्राओं का बोझ है। SPE एक्ट समाप्त होने के बाद इन पर नियंत्रण खत्म हो जाएगा और नौकरी असुरक्षा बढ़ जाएगी।
वहीं यूनियन के वरिष्ठ सदस्य विनोद कुमार ने कहा कि सरकार लेबर कोड्स के फायदे गिनाकर वास्तविकता छिपा रही है। SPEs को उनकी नौकरी की प्रकृति समझे बिना असंगठित श्रमिकों की श्रेणी में धकेला जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
यूनियन की मुख्य मांगें
- लेबर कोड्स को गैर-संवैधानिक तरीके से लागू करना बंद किया जाए।
- SPE (कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, 1976 को सुरक्षित रखा जाए और इसे समाप्त करने का निर्णय वापस लिया जाए।
- SPE एक्ट के सेक्शन 12 के तहत कानूनी कार्य नियमों को जल्द नोटिफाई किया जाए।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2045518

