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जिला परिषद वार्ड-5 में मुकाबले की चर्चा तेज, राहुल जाखड़ की निर्दलीय दावेदारी से बदले समीकरण


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जिला परिषद वार्ड-5 में मुकाबले की चर्चा तेज, राहुल जाखड़ की निर्दलीय दावेदारी से बदले समीकरण

भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुल्हरी भी मैदान में, कांग्रेस प्रत्याशी के सामने भी चुनौती; युवा और नाराज मतदाताओं के रुख पर नजर

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : लतीफ खां

बिसाऊ : जिला परिषद वार्ड नंबर-5 में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्दलीय प्रत्याशी राहुल जाखड़ और भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुल्हरी की उम्मीदवारी को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं चल रही हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी के सामने भी चुनावी चुनौती बनी हुई है। टिकट वितरण के बाद बने हालात और मतदाताओं के संभावित रुख ने मुकाबले को चर्चा का विषय बना दिया है।

कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय उतरे राहुल

कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद 25 वर्षीय राहुल जाखड़ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं। उनके अनुसार, वे करीब 10 वर्षों तक कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे हैं और दो बार एनएसयूआई जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ऐसे में उनकी निर्दलीय दावेदारी को संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के रुख के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

युवा और नाराज मतदाताओं पर नजर

राहुल जाखड़ की उम्मीदवारी के बाद युवा मतदाताओं और टिकट वितरण से नाराज लोगों के संभावित रुख को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि उनकी निर्दलीय दावेदारी का भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ेगा। हालांकि, मतदाताओं के वास्तविक रुख को लेकर अभी कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती

भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुल्हरी की उम्मीदवारी और राहुल जाखड़ की निर्दलीय दावेदारी के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस प्रत्याशी की स्थिति भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बनी हुई है। फिलहाल किसी प्रत्याशी की बढ़त या किसी दल को होने वाले नुकसान के संबंध में ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

मतदान के बाद साफ होगी तस्वीर

वार्ड नंबर-5 में युवा मतदाताओं, परंपरागत पार्टी समर्थकों और टिकट वितरण से नाराज मतदाताओं का रुख चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है। राहुल जाखड़ की निर्दलीय दावेदारी, हर्षिनी कुल्हरी की भाजपा उम्मीदवारी और कांग्रेस की रणनीति पर क्षेत्र की नजर है। अब देखना होगा कि चुनाव में मतदाता किस प्रत्याशी के पक्ष में अपना समर्थन व्यक्त करते हैं। वास्तविक स्थिति मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।

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