ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई:वेदाचार्य बोले- रामायण केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है
ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई:वेदाचार्य बोले- रामायण केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है
सरदारशहर : सरदारशहर में श्री सप्तर्षि वेद वेदांग ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम में संस्कृत भारती, चूरू जनपद के सहयोग से महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता हुलासमल व्यास ने की। मुख्य वक्ता वेदाचार्य अभिषेक पाण्डेय ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल रामायण के रचयिता ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य के आदिकवि और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि रामायण महज एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और आदर्शों की सीख देने वाला महाकाव्य है।
युवाओं से रामायण के आदर्श अपनाने की अपील
वेदाचार्य पाण्डेय ने युवाओं से रामायण में बताए गए आदर्शों और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला बताया।
कई लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर संस्था के मंत्री सुरेंद्र दाधीच, प्रधानाचार्य भेरूदान पारीक, वेदाचार्य रामदेव पारीक, विनोद शर्मा, बिशनलाल पुरोहित, पंकज बोचीवाल, विकास पारीक, राकेश शर्मा और रामचंद्र दाधीच सहित कई लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ज्योतिषाचार्य घनश्याम शर्मा ने किया।
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