250 साल पुरानी ऐतिहासिक छतरी के सामने अस्थायी मूत्रालय, चूरू की विरासत पर बदनुमा दाग
250 साल पुरानी ऐतिहासिक छतरी के सामने अस्थायी मूत्रालय, चूरू की विरासत पर बदनुमा दाग
चूरू : अपनी ऐतिहासिक हवेलियों और भित्तिचित्रों के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाले चूरू में करीब 250 वर्ष पुरानी टकनेतो की आठखंभा छतरी उपेक्षा का शिकार है। छतरी के ठीक सामने अस्थायी मूत्रालय बनाए जाने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों में नाराजगी है। लोगों ने प्रशासन से ऐतिहासिक धरोहर की साफ-सफाई और संरक्षण की मांग की है।
नगरपरिषद के अधीन आने वाली इस ऐतिहासिक छतरी का स्थापत्य और निर्माण से जुड़े लिखित प्रमाण इसे विशेष महत्व देते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, छतरी के सामने अस्थायी मूत्रालय बनने से वहां गंदगी फैल रही है और ऐतिहासिक स्थल की सुंदरता प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर माहौल मिल सके।
पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा ने बताया कि इस समस्या को लेकर चूरू जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत भ्रमण पर आने वाले विदेशी पर्यटक यहां की ऐतिहासिक छतरियों और स्थापत्य कला की तस्वीरें लेते हैं। ऐसे में इन धरोहरों की साफ-सफाई और उचित देखरेख आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चूरू की पहचान केवल हवेलियों और भित्तिचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां स्थित मंदिर, छतरियां, बावड़ियां और कुएं भी ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन सभी धरोहरों का संरक्षण किया जाना चाहिए।
लोगों ने जिला प्रशासन, नगरपरिषद और पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग से मांग की है कि आठखंभा छतरी के सामने बने अस्थायी मूत्रालय को हटाया जाए, आसपास नियमित साफ-सफाई करवाई जाए तथा छतरी के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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