2022 की तार चोरी के मामले में आरटीआई से मिला 2017 की एफआईआर का रिकॉर्ड, जांच समिति बदलने पर भी उठे सवाल
फतेहपुर विद्युत निगम का मामला: तत्कालीन मुख्य अभियंता गिरीश पारीक और जांच अधिकारी पीएस ठाक्कन ने जांच समिति बदले जाने की बात कही, अब कार्रवाई और रिकॉर्ड पर जवाब का इंतजार
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा
फतेहपुर : विद्युत निगम के फतेहपुर सिटी कार्यालय में इन दिनों ‘विज्ञान और समय’ को चुनौती देने वाला एक अद्भुत चमत्कार देखने को मिल रहा है। मामला भेड़ फार्म, बीहड़ क्षेत्र फतेहपुर और सालासर रोड पर कथित तौर पर भारी मात्रा में गायब हुई डेड लाइनों के भारी भरकम डॉग वायर तारों से जुड़ा है। मामला वर्ष 2022 का है, जब ऑन-कैमरा दिए गए बयानों में तत्कालीन सहायक अभियंता (एईएन) ने खुले दिल से स्वीकार किया था कि लाइनों से तार गायब हुए हैं और नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मगर आज तक आखिर कानूनी कार्रवाई क्यों नही हुई।।
लेकिन, जब इस ‘कानूनी कार्रवाई’ की हकीकत जानने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) का सहारा लिया गया, तो जो जवाब सामने आया, उसने प्रशासनिक दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को भी हैरत में डाल दिया है!
आरटीआई में ‘टाइम मशीन’ का कमाल!
अमूमन सरकारी विभागों में आरटीआई आवेदनों को टालने के लिए कुछ मामलों में ‘सूचना उपलब्ध नहीं है’ का सीधा-साधा बहाना बनाया जाता है। लेकिन फतेहपुर सिटी शाखा के होनहार इंजीनियरों ने इनकार करने की जहमत ही नहीं उठाई। उन्होंने एक कदम और आगे बढ़कर ‘टाइम मशीन’ का अनोखा इंजीनियरिंग तरीका इस्तेमाल किया हैं!
जब-जब वर्ष 2022 वाली तार चोरी की एफआईआर की प्रति मांगी गई, तब-तब निगम के जिम्मेदारों ने मुस्कुराते हुए वर्ष 2017 की एक पुरानी एफआईआर की कॉपी लिफाफे में बंद करके आवेदनकर्ता को भेज दी हैं! सूत्रों की माने तो जांच टीमों को भी यही पुरानी एफ आई आर सौंपकर मामले को गोलमाल कर दिया गया था।
यानी घटना 2022 की और जवाब 2017 का! इसे ही कहते हैं – ‘ना भी नहीं कहा और काम भी नहीं किया!’ आमजन अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या 2017 की एफआईआर में इतना जादुई असर है कि वह 5 साल बाद होने वाली हर चोरी पर अपने आप लागू हो जाती है?

दो घंटे की निष्पक्ष जांच और ‘अदृश्य शक्तियों’ का खौफ!
जब इस पूरे मामले वर्ष 2022 में जयपुर गुलाबी टाइम्स के आबिद खान दाडून्दा ने एक बड़े स्टिंग के तहत खबरो को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, तो तत्कालीन मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) गिरीश पारीक ने अपने एक कड़क आदेश से तुरंत जांच टीम का गठन कर जांच टीम को फतेहपुर सिटी शाखा भेजा गया था।
इस टीम में निगम के दो बेदाग और बेहद कड़क अधिकारी – पी. एस. ठाक्कन और मूलचंद वर्मा (तत्कालीन एक्सईएन) शामिल थे। सूत्रों की मानें तो निगम के गलियारों में इन दोनों ही अधिकारियों की साख ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने वाले निष्पक्ष अफसरों की रही है, जो किसी भी दबाव या पक्षपात के आगे नहीं झुकते हैं। लेकिन कहानी में असली और हैरतअंगेज मोड़ तब आया जब इन दोनों अधिकारियों ने आबिद खान से मजबूत सबूत लिए और फतेहपुर सिटी शाखा में पहुँचकर रिकॉर्ड खंगालना शुरू ही किया था कि कथित तौर पर ‘अदृश्य शक्तियों’ में हड़कंप मच गया!
महज दो घंटे की जांच के बाद ही इन दोनों निष्पक्ष अधिकारियों को इस जांच से हटाने का फरमान भी जारी हो गया था। और आनन-फानन में निगम ने ही एक नई समिति का गठन कर दिया गया। गलियारों में अब यह चुटकी ली जा रही है कि क्या वह नई कमिटी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और ‘जातीय व प्रशासनिक संतुलन’ बिठाने के लिए बनाई गई थी?
और प्रशासनिक हलकों में अब यह चर्चा बेहद गर्म है कि क्या ठाक्कन और वर्मा की बेदाग कार्यशैली ही उनके हटने की वजह बन गई? क्या नई कमिटी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और पसंदीदा समीकरण बिठाने के लिए बनाई गई थी? सूत्रों की माने तो नए जांच अधिकारियों को भी पुरानी एफ आई आर की कॉपी सौंपकर मामले को दबा दिया गया था।
2017 बनाम 2022: एफ आई आर की असली गणित क्या है..?
निगम की फाइलों में दर्ज सच यह है कि वर्ष 2017 में बीकानेर रोड (मयूर होटल के सामने) हुई तार चोरी के मामले में तत्कालीन जेईएन मुकेश कुमार टेलर ने बाकायदा एफआईआर दर्ज करवाई थी। वह मामला बिल्कुल अलग स्थान, अलग समय और अलग परिस्थितियों और अलग लोकेशन का था।
अब सवाल यह उठता है:
क्या 2017 में दर्ज हुई एफआईआर का इस्तेमाल 2022 में हुई कथित चोरी पर पर्दा डालने के लिए एक ‘सार्वभौमिक ढाल’ की तरह किया जा रहा है?
जब 2022 में तत्कालीन एईएन साहब ने खुद कैमरे के सामने यह माना था कि चोरी हुई है, तो फिर 2022 के मामले में असल एफआईआर दर्ज कराने से हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं? आखिर ऐसी क्या वजह हैं।
RTI में 2022 के बदले 2017 का कागज थमाना महज एक ‘प्रशासनिक चूक’ है या फिर सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान को दबाने की सोची-समझी कागजी जादूगरी चाल?

कैमरा सच बोलता है, मगर फाइलें मौन क्यों हैं?
सार्वजनिक संपत्ति के गायब होने पर कार्रवाई करने के बजाय पुरानी फाइलों का ‘लेप’ लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की यह कला वाकई काबिले-तारीफ है। लेकिन सवाल आज भी अपनी जगह कायम है—क्या 2022 में भेड़ फार्म बीहड़ क्षेत्र और सालासर रोड से गायब हुए तारों का हिसाब कभी सार्वजनिक होगा, या फिर हर सवाल के जवाब में 2017 का वही पुराना पन्ना थमा दिया जाएगा?
यह मामला अब सिर्फ तारों की चोरी का नहीं, बल्कि निष्पक्ष अधिकारियों को जांच से हटाने, आरटीआई और जन-जवाबदेही के साथ हो रहे इस अनूठे ‘कागजी खेल’ पर लगे बड़े प्रश्नचिह्न का है, जिसका पारदर्शी जवाब विद्युत निगम के उच्च अधिकारियों को देना ही होगा।
क्या प्रकाशित होने के बाद सीएमडी और एमडी इस मामले में दूध का दूध पानी का पानी करेंगे ये देखना होगा।।
इनका क्या कहना हैं।
काफी पुरानी बाते हैं। फतेहपुर में तारो की चोरी होना और उसके बाद एफआईआर दर्ज नही होना की ये खबर पढ़ने के बाद मेने दो जांच अधिकारी एक्सईएन लेवल के नियुक्त किए थे जिनको आदेश मेने ही दिए थे। जिनमे पीएस ठाक्कन जी और मूलचंद वर्मा जी थे दोनो को फतेहपुर मेने ही भेजा था जांच शुरू ही हुई थी कि ऊपर से आदेश आ गया और दूसरे जांच अधिकारी एमडी ऑफिस से लगा दिए गए थे और इन दोनो को हटा दिया गया था। मुझे अच्छे से याद हैं – गिरिस पारीक, तत्कालीन चीफ इंजीनियर (संभागीय मुख्य अभियंता) बिजली विभाग
हा मैं और मूल चंद जी जांच करने गए थे आप से भी काफी एविडेंस लिए थे आपके घर भी आए थे आप से एविडेंस लेने के लिए, बाद में हम फतेहपुर सिटी ऑफिस गए तो वहां जाते ही हमने रिकॉर्ड चेक करना शुरू ही किया था कि अचानक से जांच रोकने का मेसेज आ गया था और हम वापिस आ गए पता चला कि दूसरी जांच कमिटी बना दी गई हैं। और हमे हटा दिया गया हैं। – पी एस ठाक्कन तत्कालीन जांच अधिकारी एक्सईएन बिजली विभाग
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