लेबर सेस नहीं दिया तो संपत्ति कुर्क, प्रतिष्ठान होंगे सील:500 से ज्यादा निर्माण स्थलों और प्रतिष्ठानों को नोटिस, एक संस्थान सील
लेबर सेस नहीं दिया तो संपत्ति कुर्क, प्रतिष्ठान होंगे सील:500 से ज्यादा निर्माण स्थलों और प्रतिष्ठानों को नोटिस, एक संस्थान सील
झुंझुनूं : आपने मकान बनाया, व्यावसायिक भवन खड़ा किया या होटल-रेस्टोरेंट, अस्पताल, कोचिंग, वेयरहाउस जैसा प्रतिष्ठान शुरू किया और निर्माण पर देय लेबर सेस जमा नहीं कराया है, तो अब मामला केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहेगा। बकाया सेस की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क करने और प्रतिष्ठान सील करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
श्रम विभाग ने झुंझुनूं में लेबर सेस की वसूली को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 500 से ज्यादा निर्माण स्थलों, व्यावसायिक और निजी प्रतिष्ठानों को सर्वे नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिस के जरिए निर्माण की लागत, निर्माण की प्रकृति और देय लेबर सेस की जानकारी जुटाई जा रही है।
श्रम कल्याण अधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने बताया – जिले में एक संस्थान के खिलाफ कुर्की नोटिस जारी करने के बाद सीलबंदी की कार्रवाई भी की जा चुकी है। इससे साफ है कि सेस की वसूली अब केवल कागजी नोटिस और पत्राचार तक सीमित नहीं रहने वाली है।
1 प्रतिशत लेबर सेस नहीं दिया तो ब्याज और पेनल्टी भी
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों पर नियमानुसार निर्माण लागत का 1 प्रतिशत लेबर सेस देय होता है। यह राशि निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं में उपयोग की जाती है। यानी निर्माण कार्य की लागत जितनी होगी, उसी के हिसाब से लेबर सेस की देयता तय होगी।
श्रम कल्याण अधिकारी मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि निर्धारित समय पर सेस जमा नहीं कराने पर 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय हो सकता है। इसके साथ 100 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी (शास्ति) भी लगाई जा सकती है। इसके बाद भी राशि जमा नहीं करने पर विभागीय प्रक्रिया के तहत मामला कुर्की और सीलबंदी तक पहुंच सकता है।
500 से ज्यादा को नोटिस, अब निर्माण की लागत जांची जाएगी
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 500 से ज्यादा निर्माण स्थलों और प्रतिष्ठानों को सर्वे नोटिस दिए गए हैं। इनका मकसद केवल सेस जमा कराने के लिए सूचना देना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी है कि संबंधित निर्माण की वास्तविक लागत कितनी है और उस पर कितना लेबर सेस बनता है।
विभाग की ओर से निर्माण की प्रकृति, लागत और सेस की देयता का आकलन करने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में जिन लोगों को सर्वे नोटिस मिल चुके हैं, उनके लिए इसे सामान्य विभागीय पत्र मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
इन निर्माणों और प्रतिष्ठानों पर लागू हो सकता है सेस
लेबर सेस का दायरा केवल सरकारी निर्माण तक सीमित नहीं है। नियमानुसार इसके दायरे में आने वाले निजी और व्यावसायिक निर्माण भी इसकी जद में आ सकते हैं। इनमें आवासीय भवन, वाणिज्यिक भवन और प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान, कोचिंग संस्थान, अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, मैरिज गार्डन, धर्मशाला, निजी कम्युनिटी भवन, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, वेयरहाउस और हाउसिंग सोसायटी शामिल हैं।
27 जुलाई 2009 के बाद के निर्माण भी दायरे में
विभाग के अनुसार 27 जुलाई 2009 के बाद निर्मित निर्धारित श्रेणी के आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत निर्माण लेबर सेस के दायरे में आते हैं। इसलिए केवल यह आधार पर्याप्त नहीं है कि निर्माण पुराना है या कई साल पहले पूरा हो चुका है। संबंधित निर्माण की प्रकृति और उस पर लागू नियमों के आधार पर सेस की देयता निर्धारित की जा सकती है।
विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं कराने पर राजस्व कानून के तहत वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत संपत्ति कुर्क करने और संबंधित प्रतिष्ठान को सील करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है।
1 प्रतिशत छोटा दिखता है, लेकिन बकाया बड़ा हो सकता है
लेबर सेस निर्माण लागत का केवल 1 प्रतिशत है, लेकिन बड़ी लागत वाले निर्माण में यही राशि काफी हो सकती है। समय पर भुगतान नहीं होने पर इसमें ब्याज और पेनल्टी जुड़ने से कुल देनदारी और बढ़ सकती है। ऐसे में विभाग की ओर से जारी सर्वे नोटिस को नजरअंदाज करने के बजाय निर्माण की लागत और देय सेस की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है।
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