स्वामी विवेकानंद की राजस्थान यात्राओं पर अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र का विमोचन
‘एक कर्मयोगी की राजस्थान यात्राएं’ में विवेकानंद के राजस्थान प्रवास, चिंतन और कर्मयोग को किया रेखांकित
झुंझुनूं : स्वामी विवेकानंद के राजस्थान प्रवास, आध्यात्मिक चिंतन और कर्मयोग पर आधारित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र ‘एक कर्मयोगी की राजस्थान यात्राएं’ का मंगलवार को सूचना केंद्र सभागार में आयोजित समारोह में विमोचन किया गया। शोध पत्र का लेखन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार एवं स्वामी विवेकानंद सेवा संस्थान, झुंझुनूं के डॉ. जुल्फिकार ने किया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुल्हरी ने की, जबकि जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग मुख्य अतिथि रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभागीय प्रचारक अशोक सिंह शेखावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत, एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र पूनिया, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा तथा एसीबी के पूर्व पुलिस अधीक्षक मो. इस्माइल खान विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
स्वागत भाषण में डॉ. जुल्फिकार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए शोध पत्र की विषयवस्तु और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के राजस्थान प्रवास, उनके आध्यात्मिक चिंतन तथा कर्मयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शोध के माध्यम से सामने रखने की बात कही।
खेतड़ी रही स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक एवं कर्मभूमि
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस के विभागीय प्रचारक अशोक सिंह शेखावत ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का राजस्थान से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने खेतड़ी में करीब 109 दिन बिताए। इस दौरान उन्हें आध्यात्मिक चिंतन के साथ अपने विचारों को कर्म के धरातल पर आगे बढ़ाने का अवसर मिला। खेतड़ी स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक एवं कर्मभूमि रही है।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक संबोधन के माध्यम से भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और वैदिक विचारधारा को विश्व पटल पर पहचान दिलाई। उनका संदेश आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सेवा और आत्मविश्वास के लिए प्रेरित करता है।
युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा हैं विवेकानंद
जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने शोध पत्र के प्रकाशन एवं विमोचन की सराहना करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने ज्ञान, आध्यात्मिकता और कर्म को एक साथ जोड़ते हुए समाज एवं राष्ट्र के प्रति दायित्व का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि ‘एक कर्मयोगी की राजस्थान यात्राएं’ जैसे शोध कार्य स्वामी विवेकानंद के राजस्थान से जुड़े जीवन प्रसंगों और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राजस्थान में उनके प्रवास और तत्कालीन सामाजिक एवं आध्यात्मिक परिवेश के अध्ययन से उनके व्यक्तित्व के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है।
शिकागो भाषण ने विश्व में मजबूत की भारत की पहचान
भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुल्हरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जीवनी और उनके विचार आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम, सेवा और मानवता का संदेश दिया। शिकागो धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका संबोधन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के लिए ऐतिहासिक रहा।
उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के जीवन और साहित्य का अध्ययन कर उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके विचार व्यक्ति को आत्मविश्वासी बनने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
शिक्षा अनुदेशकों का सम्मान
समारोह के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षा अनुदेशकों को भी सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित शिक्षा अनुदेशकों को शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा और समाज निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के जीवन, राजस्थान से उनके संबंध तथा युवाओं के लिए उनके विचारों की प्रासंगिकता पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। समारोह में बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मूलचंद झाझड़िया ने किया।
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