[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

झुंझुनूं में कल से शुरू होगी न्याय की टेबल:बातचीत से हल होंगे कंज्यूमर के मामले; प्री काउंसिलिंग भी होगी


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

झुंझुनूं में कल से शुरू होगी न्याय की टेबल:बातचीत से हल होंगे कंज्यूमर के मामले; प्री काउंसिलिंग भी होगी

झुंझुनूं में कल से शुरू होगी न्याय की टेबल:बातचीत से हल होंगे कंज्यूमर के मामले; प्री काउंसिलिंग भी होगी

झुंझुनूं : झुंझुनूं में उपभोक्ता मामले में निपटारे को लेकर मंगलवार से फिर ‘न्याय टेबल’ शुरू की जाएगी। राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत यहां प्री-काउंसिलिंग की जाएगी। इसमें पीड़ित और सर्विस प्रोवाइडर (सेवा प्रदाता) को आमने-सामने बैठाकर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक तारीखों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।

बातचीत से हल होंगे मामले

उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील की पहल पर ‘न्याय टेबल’ की शुरुआत की गई है। पिछले साल राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान भी इस तरह की पहल की गई थी। इसके माध्यम से कई लंबित उपभोक्ता मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझाइश कर विवादों को खत्म करने का प्रयास किया गया था। इस पहल से उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ ही लंबित मामलों का बोझ कम करने में भी मदद मिली। कल मंगलवार से शुरू होने वाले इस प्रक्रिया में बातचीत के माध्यम से मामले जल्दी खत्म करने का रास्ता मिल सकेगा।

24 से 72 घंटे में राहत का प्रयास

उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने बताया कि न्याय टेबल के माध्यम से पीड़ित उपभोक्ताओं को 24 से 72 घंटे की कम समयावधि में राहत देने का प्रयास किया गया है। दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है, वहां बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर रहेगा। उनका समय और पैसा दोनों का खर्च बचेगा।

आगे अपील का रास्ता बंद

राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से निस्तारित मामलों को अंतिम रूप दिया जाता है। ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर उसी समझौते को लेकर आगे अपील का रास्ता उपलब्ध नहीं रहता। इसलिए समझौता करने से पहले दोनों पक्षों को उसके परिणाम और शर्तों को पूरी तरह समझ लेना जरूरी है।

आयोग अध्यक्ष ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान करना है। इससे उपभोक्ता को जल्दी राहत मिलती है और सेवा प्रदाता को भी लंबे विवाद से छुटकारा मिलता है।

Related Articles