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सीकर में पुरातत्व एवं अभिलेख विज्ञान कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन, शेखावाटी की विरासत पर मंथन


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सीकर में पुरातत्व एवं अभिलेख विज्ञान कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन, शेखावाटी की विरासत पर मंथन

सीकर में पुरातत्व एवं अभिलेख विज्ञान कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन, शेखावाटी की विरासत पर मंथन

सीकर : भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यता पर पुरातत्व एवं अभिलेख विज्ञान कांग्रेस का छठा राष्ट्रीय अधिवेशन जाट बोर्डिंग में आयोजित हो रहा है। तीन दिवसीय अधिवेशन भारतीय पुरातत्व विभाग, राजस्थान जयपुर, पुरातत्व एवं अभिलेख विज्ञान कांग्रेस बीकानेर तथा त्रिलोक सिंह शोध एवं विकास संस्थान, सीकर के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।

अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों और विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थी, पुरातत्वविद् एवं इतिहासकार शेखावाटी की कला, संस्कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक विरासत पर शोध प्रस्तुत कर रहे हैं। यहां की चित्रकला, शिल्पकला, वास्तुकला, मंदिरों, किलों, भवन निर्माण शैली, प्रागैतिहासिक औजारों, प्राचीन टकसालों तथा उत्खनन में मिले कुषाणकालीन सिक्कों और सभ्यताओं के अवशेषों पर अध्ययन एवं चर्चा की जा रही है। साथ ही पुरातन शोध को वर्तमान समय में उपयोगी बनाने के उपायों पर भी मंथन हो रहा है।

अधिवेशन में बबाई निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार गोविंद राम हरितवाल की पुस्तक ‘पुरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का गांव : डाडा फतेहपुरा’ का विमोचन किया गया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष बीएल भदानी, राजस्थान पुरातत्व विभाग के निदेशक पंकज धरेंद्र, पूर्व मुद्रा शास्त्री जफर उल्लाह खान, कार्यक्रम संयोजक गणेश बेरवाल, पूर्व जिला न्यायाधीश रतन लाल मुंड, सेवानिवृत्त आईजी महेंद्र सिंह, इतिहासकार मुरारी लाल शर्मा, श्याम महर्षि, पूर्व सैन्य अधिकारी केसर देव नेहरा, हैदराबाद स्थित उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दानिश मोईन, केरल विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर अजीत कुमार, रितेश व्यास, शिवनाथ सिंह एवं डॉ. मदन लाल मीणा सहित अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किया।

डॉ. मदन लाल मीणा ने कहा कि पुस्तक गांव के अतीत को जानने और उसकी ऐतिहासिक महत्ता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी। सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक महेंद्र सिंह ने कहा कि समय के साथ रीति-रिवाजों में बदलाव आया है, लेकिन समाज आज भी अपनी पुरातन जड़ों से जुड़ा हुआ है। पूर्व मुद्रा शास्त्री जफर उल्लाह खान ने पुस्तक को डाडा फतेहपुरा के लोगों के लिए अपने पूर्वजों के जीवन और गतिविधियों को समझने में उपयोगी बताया। अधिवेशन में शामिल प्रतिभागियों को पुस्तक की एक-एक प्रति निशुल्क भेंट की गई।

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