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सतगुरु कंवर साहेब बोले- इंसान सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों रहे:राजगढ़ सत्संग में कहा- प्रकृति रक्षा और सद्कर्मों से सार्थक होता है जीवन


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सतगुरु कंवर साहेब बोले- इंसान सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों रहे:राजगढ़ सत्संग में कहा- प्रकृति रक्षा और सद्कर्मों से सार्थक होता है जीवन

सतगुरु कंवर साहेब बोले- इंसान सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों रहे:राजगढ़ सत्संग में कहा- प्रकृति रक्षा और सद्कर्मों से सार्थक होता है जीवन

सादुलपुर : परमसंत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने रविवार को राजगढ़ के चूरू रोड स्थित राधास्वामी आश्रम में संगत को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इंसान सामाजिक प्राणी है और उसकी सबसे बड़ी जरूरत समाज है। मनुष्य को सामाजिक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक भी रहना चाहिए।

कंवर साहेब ने कहा कि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का लगातार इस्तेमाल कर रहा है। पेड़-पौधे और पहाड़ काटे जा रहे हैं, तालाब सूख रहे हैं, अनाज जहरीला हो रहा है और वातावरण प्रदूषित हो रहा है। जीवन को सुरक्षित रखने के लिए प्रकृति का बचाव जरूरी है।

पेड़ों की रक्षा के लिए लोगों के बलिदान का जिक्र

उन्होंने गुरु जम्भेश्वर महाराज की प्रेरणा से राजस्थान में पेड़ों की रक्षा के लिए लोगों के बलिदान का जिक्र किया। कंवर साहेब ने कहा- आज फिर उसी जोश की जरूरत है। उन्होंने संगत से पेड़ न काटने और पशु-पक्षियों की रक्षा करने की अपील की।

उन्होंने बताया- मनुष्य के सामने दो रास्ते हैं: या तो प्रभु को अपना बना लें या स्वयं प्रभु के बन जाएं। जाति-पाति के बंधन से ऊपर उठकर भक्ति करनी चाहिए। कर्म प्रधान इस संसार में कर्म से भागना मुमकिन नहीं है, इसलिए मनुष्य को अपने कर्मों की दिशा सही रखनी चाहिए।

कंवर साहेब बोले- पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखें

कंवर साहेब ने सामाजिक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करें, बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें। ईमानदारी की कमाई खाएं और चरित्रवान बनें। पेड़ों को काटने के बजाय उनका बचाव और पोषण करें। साथ ही पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखें।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलना चाहिए। समाज के प्रति अपने दायित्व निभाते हुए प्रभु की भक्ति और सेवा में जीवन लगाना ही मानव जीवन का सही मकसद है। प्रकृति की रक्षा, जीवों पर दया, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान, ईमानदारी की कमाई, सदाचार और प्रभु को याद करना ही मनुष्य को सही मायने में इंसान बनाते हैं।

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