अब्दुल्ला अगवान के नामांकन पर आपत्ति जताई:भाई को परिषद में ठेकेदार बताया; SDM ने सबूत लाने को कहा; कांग्रेसी बोले- भाजपा दबाव बना रही
अब्दुल्ला अगवान के नामांकन पर आपत्ति जताई:भाई को परिषद में ठेकेदार बताया; SDM ने सबूत लाने को कहा; कांग्रेसी बोले- भाजपा दबाव बना रही
झुंझुनूं : नगर परिषद झुंझुनूं के सभापति पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान के नामांकन पर आपत्ति आई है। आपत्तिकर्ता विपुल कुमार ने रिटर्निंग अधिकारी और एसडीएम रामकरण सिंह को आपत्ति पेश करते हुए अब्दुल्ला अगवान के नामांकन की वैधता पर सवाल उठाए हैं। आपत्ति में प्रत्याशी के भाई के नाम नगर परिषद से जुड़े ठेकों होने का हवाला देते हुए नामांकन निरस्त करने की मांग की गई है।
आपत्ति प्राप्त होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी एसडीएम रामकरण सिंह ने आपत्तिकर्ता को संबंधित दस्तावेज और साक्ष्यों के साथ कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता का दबाव बनाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। नेताओं ने विधायक राजेंद्र भांबू पर भी प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।
सिर्फ रिश्तेदारी नहीं, ‘हित’ साबित करना होगा
एक्सपर्ट के अनुसार, नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24(1)(xv) है। इस प्रावधान में नगरपालिका सदस्य के लिए अयोग्यता की स्थिति तब बनती है, जब प्रत्याशी स्वयं या उसके परिवार के सदस्य, साझेदार, नियोक्ता या कर्मचारी के माध्यम से नगरपालिका के आदेश से किए गए किसी काम या आपूर्ति अथवा नगरपालिका के साथ किसी अनुबंध या रोजगार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शेयर या हित रखता हो।
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया
कांग्रेस की ओर से इस आपत्ति पर जवाब देते हुए कहा गया है कि केवल प्रत्याशी के भाई का नगरपालिका से ठेका होना अपने आप में प्रत्याशी को अयोग्य नहीं बनाता। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कानून के तहत वास्तविक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित का परीक्षण जरूरी है।
इस संदर्भ में कांग्रेस की कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के गुलाम यासीन खान बनाम Sahebrao Yashwantrao Walaskar मामले का हवाला दिया जा रहा है। 17 जनवरी 1966 के इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सामने नगरपालिका चुनाव में प्रत्याशी के बेटे के नगर पालिका में रोजगार के आधार पर अयोग्यता का सवाल था। कोर्ट ने केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर नगर पालिका के रोजगार में प्रत्याशी का हित मान लेने को पर्याप्त नहीं माना था।
नगर परिषद के बाहर जुटी भीड़, नारेबाजी
नामांकन पर आपत्ति की खबर सामने आने के बाद नगर परिषद परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। मौके पर नारेबाजी भी हुई। कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष खलील बुडाना सहित कांग्रेस नेताओं ने मामले को लेकर भाजपा और प्रशासन पर सवाल उठाए।
पुलिस मुस्तैद, स्थिति पर नजर
नगर परिषद के बाहर भीड़ जुटने और नारेबाजी को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिसकर्मी मौके पर मुस्तैद हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं। एहतियात के तौर पर पुलिस की ओर से आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। SDM रामकरण सिंह ने कहा कि तथ्यों की जांच के लिए नगर परिषद के कमिश्नर को लिखा गया। वह मामले की जांच कर रहे। तथ्यों के आधार पर सही फैसला होगा।
एडवोकेट बोले- कानून में भाई परिवार का सदस्य नहीं माना जाता
एडवोकेट मोहम्मद फारूक ने कहा कि भाई के नाम ठेकेदारी का लाइसेंस है, लेकिन कानून में भाई परिवार का सदस्य नहीं माना जाता। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 21 के Explanation-2 में परिवार की परिभाषा में केवल पति-पत्नी, बच्चे और साथ रहने वाले माता-पिता आते हैं — भाई नहीं।
एडवोकेट फारूक ने कहा कि यूसुफ अगवान बरसों से अब्दुल्ला से अलग रह रहे हैं। दोनों का जन आधार अलग है, राशन कार्ड अलग है और व्यापार में कभी कोई साझेदारी नहीं रही। यह सारा रिकॉर्ड आज रिटर्निंग अधिकारी के सामने पेश किया गया।
फारूक ने साफ कहा — धारा 24(1)(xv) के तहत अयोग्यता तभी बनती है जब उम्मीदवार का खुद ठेके में आर्थिक हित हो। यहां ऐसा कुछ नहीं है। शिकायत कानूनी रूप से टिकती नहीं।






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