बीमा कंपनी के प्रतिनिधि नहीं होने से क्रॉप कटिंग धीमी:तहसील में कंपनी के केवल 5 कर्मचारी तैनात, सरकारी कर्मचारी के साथ रहना
बीमा कंपनी के प्रतिनिधि नहीं होने से क्रॉप कटिंग धीमी:तहसील में कंपनी के केवल 5 कर्मचारी तैनात, सरकारी कर्मचारी के साथ रहना
सरदारशहर : सरदारशहर उपखंड में खरीफ फसलों की क्रॉप कटिंग शुरू हो गई है। लेकिन, फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि कम होने से समस्या आ रही है। नियम के मुताबिक, क्रॉप कटिंग के दौरान सरकारी कर्मचारी के साथ बीमा कंपनी का प्रतिनिधि मौजूद होना जरूरी है। अगर कंपनी का प्रतिनिधि मौके पर नहीं होगा, तो सरकारी कर्मचारियों की क्रॉप कटिंग मान्य नहीं मानी जाएगी।
सरदारशहर और भानीपुरा क्षेत्र में क्रॉप कटिंग के लिए कृषि विभाग के 35 और राजस्व विभाग के 73, कुल 108 सरकारी कर्मचारी लगाए गए हैं। वहीं, फसल बीमा कंपनी के सिर्फ 5 प्रतिनिधि ही मौजूद हैं। ऐसे में सभी तय जगहों पर समय पर क्रॉप कटिंग कराना मुश्किल हो गया है।
फसल बीमार के लिए क्रॉप कटिंग के आंकड़ें जरूरी
भानीपुरा नायब तहसीलदार प्रहलादराय पारीक ने बताया कि सरदारशहर-भानीपुरा क्षेत्र में करीब 87 हजार हेक्टेयर सिंचित जमीन है। यहां लगभग 1.90 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसलें बोई गई हैं। सरकारी कर्मचारियों की संख्या तो काफी है, लेकिन बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की कमी के कारण क्रॉप कटिंग के लिए कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ रहा है।
इस क्षेत्र में मोठ, मूंग, ग्वार, बाजरा और कपास सहित छह मुख्य खरीफ फसलों की क्रॉप कटिंग हो रही है। किसानों का कहना है कि इस बार ज्यादातर फसलें खराब हो गई हैं। ऐसे में क्रॉप कटिंग के आंकड़ें ही उनके फसल बीमा क्लेम के लिए बहुत जरूरी होंगे।
कर्मचारी बढ़ाने के लिए लिखा लेटर
एआईसी फसल बीमा कंपनी के चूरू जिला को-ऑर्डिनेटर नरेंद्र कुमावत ने बताया कि क्रॉप कटिंग तभी मान्य होगी, जब कंपनी का प्रतिनिधि मौके पर मौजूद होगा। अगर सिर्फ पटवारी या कृषि विभाग के कर्मचारी क्रॉप कटिंग करते हैं, तो वह मान्य नहीं मानी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि हर तहसील में चार-चार कर्मचारी लगाए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक कोई अतिरिक्त कर्मचारी नहीं आया है।
किसान यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान किसान यूनियन के जिला महामंत्री रामेश्वरलाल पूनिया ने आरोप लगाया कि फसल बीमा कंपनी किसानों को मिलने वाले क्लेम में रोड़ा अटकाना चाहती है। उन्होंने कहा कि पहले से ही किसानों के काफी क्लेम बकाया हैं और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस बार भी यदि पर्याप्त कर्मचारी नहीं लगाए गए और क्रॉप कटिंग समय पर नहीं हुई तो किसानों को बीमा क्लेम से वंचित होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसानों को मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ेगा।
किसान फसल उखाड़ने में जुटे, समय निकलने का डर
दूसरी ओर किसान मोठ, मूंग, बाजरा सहित अन्य खरीफ फसलों को खेतों से उखाड़ने में जुट गए हैं। ऐसे में क्रॉप कटिंग के लिए निर्धारित प्लॉटों पर समय रहते बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि कंपनी ने तत्काल कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई तो कई स्थानों पर क्रॉप कटिंग नहीं हो पाएगी और इसका सीधा असर किसानों के फसल बीमा क्लेम पर पड़ सकता है।
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