श्रीमाधोपुर में रघुनाथजी का जन्माष्टमी पर विशेष श्रृंगार:धनुष की जगह हाथों में बांसुरी, सिर पर मोरपंख मुकुट सजाया; रात 12 बजे जन्मोत्सव
श्रीमाधोपुर में रघुनाथजी का जन्माष्टमी पर विशेष श्रृंगार:धनुष की जगह हाथों में बांसुरी, सिर पर मोरपंख मुकुट सजाया; रात 12 बजे जन्मोत्सव
श्रीमाधोपुर : श्रीमाधोपुर में जन्माष्टमी पर श्रीमाधोपुर के श्री रघुनाथजी मंदिर में करीब 250 साल पुरानी अनूठी परंपरा निभाई जाती है। साल के 364 दिन भगवान राम के स्वरूप में पूजे जाने वाले रघुनाथजी का जन्माष्टमी पर कृष्ण रूप में विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान भगवान के हाथों से धनुष हटाकर बांसुरी सजाई जाती है और सिर पर मोरपंख मुकुट धारण कराया जाता है। मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सुबह से ही श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
धनुष की जगह बांसुरी, सिर पर मोरपंख मुकुट
मंदिर के महंत बुद्धिप्रकाश शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन भगवान राम की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर उन्हें कृष्ण स्वरूप दिया जाता है। प्रतिमा के हाथों से धनुष हटाकर बांसुरी सजाई जाती है और सिर पर मोरपंख मुकुट धारण कराया जाता है। राम-जानकी की प्रतिमाओं का विशेष अभिषेक किया जाता है। इसके बाद भगवान को वृंदावन से लाई गई विशेष पोशाक पहनाई जाती है। रात में भजन संध्या के बाद श्रद्धालुओं को पंजीरी और चरणामृत का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
नगर संस्थापक की प्रेरणा से बना था मंदिर
श्री रघुनाथजी मंदिर की नींव करीब 250 साल पहले रखी गई थी। नगर संस्थापक खुशालीराम बोहरा की प्रेरणा से गोविंदगढ़ के कानूनगो परिवार ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर में जन्माष्टमी के अलावा झूलोत्सव, फूलडोल, शरद पूर्णिमा और राम-जानकी विवाह महोत्सव भी आयोजित किए जाते हैं।
जन्माष्टमी पर्व पर श्रीमाधोपुर के आराध्य देव श्री गोपीनाथ मंदिर में भी बड़ा आयोजन होगा। मंदिर में सुबह से ही तैयारियां चल रही हैं। भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया है। रात को मंदिर में सजीव झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
कई मंदिरों में शाम से शुरू होंगे कार्यक्रम
शुक्रवार शाम से शहर के श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर इस्कॉन सेंटर, मुरलीमनोहर मंदिर, श्री रघुनाथ मंदिर, हरिदास आश्रम बगीची और गीता भवन में भी जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा। इन मंदिरों में भगवान का पंचामृत अभिषेक, कृष्ण की सजीव झांकियां, हरिनाम संकीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
जन्माष्टमी के अवसर पर रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आयोजन होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को पंजीरी प्रसाद वितरित किया जाएगा। सजीव झांकियों के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों से शहर का माहौल भक्तिमय रहेगा। मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।
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