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कांग्रेस ने देर रात पार्षद प्रत्याशियों को सिंबल सौंपे:सूची जारी किए बिना उम्मीदवारों को फोन कर बुलाया, टिकट वितरण अभी भी गोपनीय


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कांग्रेस ने देर रात पार्षद प्रत्याशियों को सिंबल सौंपे:सूची जारी किए बिना उम्मीदवारों को फोन कर बुलाया, टिकट वितरण अभी भी गोपनीय

कांग्रेस ने देर रात पार्षद प्रत्याशियों को सिंबल सौंपे:सूची जारी किए बिना उम्मीदवारों को फोन कर बुलाया, टिकट वितरण अभी भी गोपनीय

झुंझुनूं : नगर परिषद चुनाव के लिए कांग्रेस ने रविवार देर रात पार्षद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह (सिंबल) सौंपने की प्रक्रिया पूरी की। पार्टी ने टिकट वितरण को पूरी तरह गोपनीय रखा। अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय एक-एक उम्मीदवार को फोन कर अड़ावता स्थित सांसद बृजेन्द्र ओला के निवास पर बुलाया गया। यहां उन्हें पार्टी का सिंबल और चुनाव से जुड़े आवश्यक निर्देश दिए गए।

रात 9 बजे बाद प्रत्याशियों को आने लगे फोन

जानकारी के अनुसार रविवार रात करीब 9 बजे के बाद संभावित प्रत्याशियों के पास फोन आने शुरू हुए। जिस उम्मीदवार को फोन मिला, वह अपना चुनाव प्रचार और जनसंपर्क छोड़कर तत्काल अड़ावता स्थित सांसद निवास के लिए रवाना हो गया। कुछ ही देर में सांसद निवास पर पार्षद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। देर रात तक यहां नेताओं, कार्यकर्ताओं और टिकट दावेदारों की आवाजाही बनी रही।

एक-एक प्रत्याशी को अंदर बुलाकर दिया सिंबल

सूत्रों के अनुसार टिकट वितरण की प्रक्रिया देर रात तक चली। सांसद बृजेन्द्र ओला ने प्रत्याशियों को एक-एक कर अंदर बुलाया और उन्हें पार्टी का सिंबल सौंपा। प्रत्याशियों को अनुशासन के साथ चुनाव लड़ने और संगठन के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए। उन्हें पार्टी की रणनीति के अनुसार प्रचार करने और चुनाव में जीत के लिए जुटने की हिदायत भी दी गई।

सूची सार्वजनिक नहीं होने से बना रहा सस्पेंस

कांग्रेस ने इस बार अधिकृत प्रत्याशियों की सूची न तो सार्वजनिक की और न ही एक साथ जारी की। इसके चलते कई वार्डों में टिकट को लेकर देर रात तक सस्पेंस बना रहा। कई दावेदार अंतिम समय तक अपने नाम का इंतजार करते रहे। जिन प्रत्याशियों को सिंबल मिल गया, वे सांसद निवास से निकलते ही अपने-अपने वार्डों में समर्थकों को इसकी जानकारी देने और चुनावी तैयारियों में जुट गए।

विरोध और बगावत रोकने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस ने अधिकृत सूची जारी करने के बजाय सीधे प्रत्याशियों को सिंबल देकर अंतिम समय तक गोपनीयता बनाए रखने की रणनीति अपनाई। इसके पीछे टिकट से वंचित दावेदारों के विरोध और निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरने की संभावना को कम करना माना जा रहा है। जिन वार्डों में एक से अधिक दावेदार थे, वहां पार्टी के अंतिम फैसले को लेकर देर रात तक गतिविधियां जारी रहीं।

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