दिल का दर्द मिटा तो मासूमों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
आरबीएसके ने चूरू के दो बच्चों के जन्मजात हृदय रोग का कराया निःशुल्क उपचार, स्वस्थ होकर लौटे दोनों बच्चे
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे चूरू जिले के दो मासूम बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) उम्मीद की किरण बना। आरबीएसके की स्वास्थ्य जांच के दौरान बीमारी की पहचान होने के बाद दोनों बच्चों का आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार कराया गया। सफल उपचार के बाद दोनों बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं और परिवारों में खुशी का माहौल है।
सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि आरबीएसके के माध्यम से बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाती है। जांच के दौरान चिन्हित बच्चों को डीईआईसी सेंटर के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा जाता है और पात्र बच्चों को आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। मोबाइल हेल्थ टीम और डीईआईसी स्टाफ के समन्वय से बच्चों को समय पर उपचार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
रौनक के दिल का हुआ निःशुल्क उपचार
जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शशांक चौधरी ने बताया कि सुजानगढ़ निवासी सत्यनारायण के 10 वर्षीय पुत्र रौनक की स्कूल स्क्रीनिंग के दौरान आरबीएसके टीम ने जांच की। जांच में उसके हृदय में छेद होने की जानकारी सामने आई। टीम ने परिजनों को बीमारी और निःशुल्क उपचार की प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद रौनक को चूरू स्थित डीईआईसी सेंटर लाया गया। डीईआईसी मैनेजर विजेंद्र भाटी के समन्वय से राजकीय चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराई गई।

चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर रौनक को उच्च स्तरीय उपचार के लिए अहमदाबाद स्थित सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल भेजा गया, जहां आयुष्मान योजना के तहत उसका निःशुल्क हृदय उपचार हुआ। उपचार के बाद रौनक स्वस्थ है। रौनक के परिजनों ने आरबीएसके टीम और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताते हुए कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और निःशुल्क उपचार से उनके बच्चे को नया जीवन मिला।
गर्विता की मुस्कान से परिवार में लौटी खुशी
इसी तरह रतनगढ़ क्षेत्र के जालेऊ निवासी शंकरलाल की चार वर्षीय बेटी गर्विता भी जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी। आरबीएसके की मेडिकल टीम ने स्क्रीनिंग के दौरान उसकी जांच की, जिसमें हृदय में छेद होने की जानकारी सामने आई। परिजनों को उपचार की प्रक्रिया समझाने के बाद गर्विता को चूरू डीईआईसी सेंटर लाया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद राजकीय चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ से उसकी जांच कराई गई। चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर उसे जोधपुर के मेडिप्लस हॉस्पिटल भेजा गया, जहां आयुष्मान योजना के तहत उसका निःशुल्क उपचार कराया गया। सफल उपचार के बाद गर्विता पूरी तरह स्वस्थ है। बच्ची की खिलखिलाती मुस्कान देखकर परिवार में खुशी का माहौल है।
समय पर जांच बनी स्वस्थ भविष्य की वजह
आरबीएसके की मोबाइल हेल्थ टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कर जन्मजात एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर रही हैं। चिन्हित बच्चों को डीईआईसी सेंटर के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं से जोड़कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
समय पर पहचान, विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क उपचार ने दोनों बच्चों के परिवारों की चिंता को खुशी में बदल दिया। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या की शुरुआती पहचान बच्चों के बेहतर और स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19




Total views : 2318570


