बड़ा गड़बड़झाला.. ? बिजली विभाग में 7 हजार रुपये की फोन-पे वसूली के मामले में मचा हड़कंप
बड़ा गड़बड़झाला.. ? बिजली विभाग में 7 हजार रुपये की फोन-पे वसूली के मामले में मचा हड़कंप
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान
फतेहपुर : फतेहपुर सिटी बिजली शाखा में एफ आर टी कर्मचारी द्वारा एक उपभोक्ता से 7 हजार रुपये फोन-पे के जरिए लिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लक्ष्मीनाथ नगर निवासी एक उपभोक्ता ने घर के सामने लटक रहे बिजली के तारों से सुरक्षा के लिए एल-ब्रैकेट लगाने की शिकायत की थी। मौके के निरीक्षण और एस्टीमेट बनने के कुछ दिन बाद कथित तौर पर एक एफआरटी कर्मचारी उपभोक्ता के घर पहुंचा और काम के लिए 16 हजार रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आई।
इसके बाद 7 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से लिए जाने का आरोप है।
7 हजार रुपये फोन-पे से लेने का आरोप
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 4 अगस्त को कनिष्ठ अभियंता अंकिता ने तकनीकी कर्मचारी राकेश और चालक के साथ मौके का निरीक्षण किया था। इसके बाद एस्टीमेट तैयार कर आगे भेजे जाने की बात कही गई। आरोप है कि कुछ दिन बाद एफआरटी कर्मी नरेश योगी उपभोक्ता के पास पहुंचा और 30 से 40 हजार रुपये खर्च होने की बात कहते हुए मामला 16 हजार रुपये में तय किया। इसके बाद 7 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से उसके खाते में भेजे गए। (उपभोक्ता के भाई दिनेश रिपोर्टर के अनुसार)

पत्रकार ने मांगा आधिकारिक पक्ष, जे ई एन ने की टालमटोल
मामले की पड़ताल के दौरान पत्रकार आबिद खान दाड़ूंदा ने कनिष्ठ अभियंता अंकिता से विभागीय पक्ष जानने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान जेईएन ने जवाब देने के बजाय टालमटोल करने लागी। हालांकि, जेईएन का कहना है कि उन्हें पैसे लिए जाने की जानकारी नहीं है और उन्होंने मौके का निरीक्षण कर एस्टीमेट आगे सीसी में भेज दिया था।
अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई की बात कही
अधिशासी अभियंता शिवपाल कासनिया ने कहा कि 7 हजार रुपये किसने लिए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने मामले की जानकारी लेकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सहायक अभियंता विवेक ओला ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद बैठक कर संबंधित कर्मचारी को हटाने के आदेश कंपनी को दिए गए हैं और वे स्वयं मामले की जांच कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी से पत्रकार द्वारा पक्ष मांगना सामान्य प्रक्रिया है। इसमें बुराई कहां हैं। एफ आई आर की धमकी देना गलत हैं।
जांच के लिए डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित
मामले से जुड़े पक्ष की ओर से फोन-पे की रसीद, कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि 7 हजार रुपये की राशि आखिर किसके कहने पर ली गई और क्या इसमें किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी?
जे ई एन ने मोका रिपोर्ट की तो इसकी भनक एफ आर टी कर्मचारी को कैसे लगी? क्या यह एक संयोग मात्र था? मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
दूसरी और एफ आर टी कर्मचारी नरेश योगी के भाई अमित योगी देर रात तक मामले को मैनेज करने के लिए आबिद खान को कॉल करते रहे तथा उन से मिलने की गुहार लगाते रहे आबिद खान ने बताया कि अमित योगी बार बार ये कह रहे थे कि लड़के की नोकरी चली जाएगी आबिद खान ने जयपुर हूं का बहाना बनाकर मिलने से मना कर दिया
अब बड़ा सवाल यह हैं कि क्या उच्च स्तरीय अधिकारी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कर दूध का दूध पानी का पानी करेंगे ये देखना होगा
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