दुधवा (खेतड़ी) निवासी डॉ. लीलाधर दोचानियां के कहानी संग्रह ‘मिट्टी की कीमत’ का जयपुर में लोकार्पण
मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी डॉ. गोविंद पारीक ने किया विमोचन, साहित्य लेखन के लिए किया सम्मान
खेतड़ी : सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर डॉ. लीलाधर दोचानियां के नवीन कहानी संग्रह ‘‘मिट्टी की कीमत’’ का लोकार्पण रविवार को जयपुर में हुआ। जनसम्पर्क मित्र समूह के मासिक स्नेह मिलन कार्यक्रम में यह आयोजन श्री दिगम्बर जैन भट्टारक की नसियां, नारायण सिंह सर्किल पर हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के विशेषाधिकारी डॉ. गोविन्द पारीक मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
डॉ. पारीक ने पुस्तक का विमोचन करने के साथ ही डॉ. लीलाधर दोचानियां को उनके साहित्य लेखन के लिए शॉल ओढ़ाकर और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित भी किया।इस अवसर पर डॉ. गोविंद पारीक ने कहा कि ‘मिट्टी की कीमत’ समकालीन हिंदी कहानी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है। इसमें ग्रामीण जीवन, शहरी परिवेश, सामाजिक परिवर्तन, मानवीय संवेदनाओं और बदलते जीवन मूल्यों का सजीव और यथार्थ चित्रण किया गया है। पुस्तक की कहानियां पाठकों को समाज और जीवन के विविध आयामों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अतिरिक्त निदेशक गोपाल प्रभाकर ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. दोचानियां ने अपने जनसम्पर्क सेवा के अनुभव और सामाजिक सरोकारों को कहानियों के माध्यम से सहज, प्रभावशाली और संवेदनशील भाषा में व्यक्त किया है। उनकी कहानियों में आमजन के जीवन संघर्ष, रिश्तों की ऊष्मा और मानवीय मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
विशिष्ट अतिथि पूर्व अतिरिक्त निदेशक अलका सक्सेना ने बताया कि ‘मिट्टी की कीमत’ संघर्ष, जीवन के अनुभवों और बदलते सामाजिक परिवेश का दस्तावेज है। पूर्व संयुक्त निदेशक ईश्वरदत्त माथुर ने कहा कि इस संग्रह की कहानियां गांव की मिट्टी की सौंधी महक, मानवीय रिश्तों और जीवन मूल्यों को सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
डॉ. दोचानियां ने बताया कि यह पुस्तक पाठकों को साहित्यिक आनंद के साथ-साथ समाज और मानवीय मूल्यों पर चिंतन के लिए प्रेरित करेगी। उनकी पहली कृति “जिंदगी मुस्कुराती रहे” को मिले पाठकों के स्नेह ने ही उन्हें यह कहानी संग्रह लिखने की प्रेरणा दी।
समारोह में वरिष्ठ जनसम्पर्ककर्मी रवि गोस्वामी, यादवेन्द्र सेन, गणपत सिंह नारोलिया, रेणु जुनेजा, राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’, रूप सिंह कविया, वीना करमचंदानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पूर्व सहायक निदेशक गोविंद शर्मा ने किया। उपस्थित वक्ताओं ने पुस्तक की साहित्यिक गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे समकालीन हिंदी कहानी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान बताया।
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