दो दर्जन से अधिक प्राण वायु हरे पेड़ों की बिजली विभाग ने छीनी दिनदहाड़े सांसे:शराब-शबाब पार्टी के बीच देवास में चले जीवन दाताओं पर कुल्हाड़े
बिना अनुमति के हाई टेंशन लाइनों के नीचे देवास गांव में बिजली विभाग ने काटे हरे पेड़, वन विभाग के डीएफओ बोले मार्केट वैल्यू से ढाई गुणा लगेगा जुर्माना, बिजली विभाग के जिला अधिकारी बोले विभागीय कार्रवाई करेंगे
जनमानस शेखावाटी न्यूज सवांददाता : आबिद खान दाडून्दा
फतेहपुर : एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें ‘एक पेड़ मां के नाम’ के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के सीकर जिले की फतेहपुर तहसील स्थित देवास गांव में बिजली विभाग की रोलसाबसर शाखा के सरकारी नुमाइंदों के कारनामों ने इन सरकारी दावों की पोल खोल दी है। देवास गांव में वन विभाग की जमीन से गुजर रही हाई-टेंशन लाइनों के नीचे, बिजली विभाग की रोलसाबसर शाखा के जिम्मेदारों ने दो दर्जन से अधिक लहलाहाते हरे-भरे पेड़ों पर बिना किसी अनुमति के बेरहमी से कुल्हाड़ी चला दी जिसमे दो दर्जनों से अधिक पेड़ जड़ से कटे पाए गए हैं।
जब ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज‘ और ‘टीम खोल पोल’ की संयुक्त टीम भीषण गर्मी में जमीनी हकीकत जानने डरावने और कंटीले जंगल में पहुंची और काटे गए पेड़ों के वीडियो बनाने शुरू किए, तो मौके पर मौजूद बिजली विभाग के कार्मिक उल्टे पैर भागते नजर आए। जिनके भागते हुए वीडियो हमारे केमरे में कैद हैं।
जाम से जाम टकराए और कट गए जीवनदाता!
मौके पर पहुँची मीडिया टीम के कैमरे में जो तस्वीरें कैद हुईं, वे सिर्फ पर्यावरण की हत्या की नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई की भी दास्तान की चीख चीख कर गवाही बयां कर रही हैं। काटे गए पेड़ों की छांव में शराब की ताजा बोतलें और पार्टी का सामान बिखरा पड़ा था। जिस जगह से अधिकारी और कर्मचारी मीडिया को देखकर भागे, वहां शराब और शबाब का दौर जारी था। ताजा शराब की बोतले ये बताने के लिए काफी थी कि किस तरह पेड़ो की हत्या की गई हैं। सवाल उठना लाजमी है कि क्या नशे की धुन में इन जीवनदाताओं की सांसे छीनी गईं?
इस पूरे घटनाक्रम पर जब वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी (रेंजर) नरेंद्र सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए मीडिया टीम के ब्यूरो चीफ आबिद खान दाडून्दा ने दिनभर कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, तो मीडिया टीम के नंबर जानते हुए भी उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। रेंजर साहब की यह रहस्यमयी चुप्पी इशारा करती है कि कहीं यह ‘कुल्हाड़ी तंत्र’ किसी सांठ-गांठ का नतीजा तो नहीं है? हालांकि दिन भर मामले को दबाने के लिए कई नेताओं और बिजली विभाग के कार्मिकों के कॉल जनमानस शेखावाटी न्यूज के पास आते रहे लेकिन निडर निष्पक्ष पत्रकारिता के धर्म के साथ हमारी टीम इस मामले को प्रमुखता से उठा रही हैं । और आगे भी उठाएगी
नियमों को ठेंगा: ट्रिमिंग की जगह जड़ से सफाई
विद्युत विभाग की अपनी गाइडलाइन स्पष्ट कहती है कि यदि हाई-टेंशन लाइन से कोई पेड़ टकराता है, तो केवल उसकी डालियों की छंगाई या ट्रिमिंग की जानी चाहिए। लेकिन फतेहपुर के देवास में तो ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत चरितार्थ करते हुए बिजली विभाग ने दो दर्जन से ज्यादा जिंदा पेड़ों को सीधे जड़ों से ही मौत के घाट सुला दिया।
यह बिजली विभाग का पहला मौका नहीं है। वर्ष 2022 में भी नेशनल हाईवे-11 पर बिजली विभाग की फतेहपुर सिटी शाखा ने करीब 20 हरे पेड़ों की बलि चढ़ाई थी। तब ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज‘ द्वारा प्रमुखता से खबर उठाए जाने पर वन विभाग ने महज नाममात्र का जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया था। उल्टे, अपनी नाकामी छुपाने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों ने मीडिया पर ही राजकार्य में बाधा जैसी संगीन धाराओं में मनगढ़ंत मुकदमा दर्ज करवाकर डराने का दबाने का नाकाम प्रयास किया गया था , जिसमें मीडिया टीम के आबिद खान कानूनी रूप से पूरी तरह बरी हुए। एसी कमरों में बैठकर सच की आवाज को मुकदमों से दबाने की कोशिश करने वाले जिम्मेदारों से सीधा सवाल जनमानस शेखावाटी न्यूज का है— इन बेजुबान पेड़ों की सांसे छीनने का हक आखिर आपको दिया किसने हैं?
अधिकारियों के रुख पर एक नजर
”मामला मेरे संज्ञान में आया है कि हरे पेड़ बिजली विभाग ने काटे हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार पेड़ की मार्केट वैल्यू का दो से ढाई गुणा प्रति पेड़ जुर्माना लगाने का प्रावधान है। मैंने अपनी टीम को तुरंत एफ आई आर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। पेड़ काटने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।”– प्रदीप कुमार डीएफओ (जिला वन अधिकारी), सीकर:
”पेड़ काटना बेहद गंभीर अपराध है। हमारी गाइडलाइन में सिर्फ ट्रिमिंग की अनुमति है। अगर कर्मचारियों ने पेड़ों को काटा है, तो मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पेड़ अनमोल हैं और उनका संरक्षण हम सभी का कर्तव्य है।”– सुभाष देवंदा, अधीक्षण अभियंता (SE), बिजली विभाग, सीकर:
कलम नहीं रुकेगी, जब तक न्याय न मिले
सरकारी विज्ञापनों में पेड़ लगाने का ढिंढोरा पीटने वाली व्यवस्था अगर अपने ही विभागों के ऐसे कारनामों पर पर्दा डाला गया, तो ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी। ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज‘ का यह स्पष्ट संदेश है कि चाहे जितने मुकदमे दर्ज करा दिए जाएं, जब तक हरे पेड़ों की हत्या करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर वन विभाग व प्रशासन की ओर से ठोस और मिसाली कार्रवाई नहीं होती, तब तक सच उजागर करने का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। ध्यान रहे जनमानस शेखावाटी न्यूज के पास दो दर्जन से अधिक कटे हुए हरे पेड़ो के वीडियो सुरक्षित हैं। फिर भी दबी जुबान में सूचना हैं कि वन विभाग के अधिकारी 18 से 20 पेड़ो की कार्रवाई करने के मूड में हैं अगर ऐसा होता हैं। तो जनमानस शेखावाटी न्यूज मौके के वीडियो सबूतों को लेकर उच्च स्तरीय कार्रवाई भी करवाने में भी पीछे नहीं हटेगा। क्योंकि पेड़ बचाना मीडिया का ही नही हर नागरिक का पहला धर्म हैं।




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