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सादुलपुर में संगीतज्ञ अब्दुल सतार राणा को श्रद्धांजलि:शिक्षाविदों, साहित्यकारों ने दो मिनट का मौन रखकर नमन किया


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सादुलपुर में संगीतज्ञ अब्दुल सतार राणा को श्रद्धांजलि:शिक्षाविदों, साहित्यकारों ने दो मिनट का मौन रखकर नमन किया

सादुलपुर में संगीतज्ञ अब्दुल सतार राणा को श्रद्धांजलि:शिक्षाविदों, साहित्यकारों ने दो मिनट का मौन रखकर नमन किया

सादुलपुर : सादुलपुर में प्रख्यात संगीतज्ञ अब्दुल सतार राणा की स्मृति में रविवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। शिक्षा एवं साहित्य विकास समिति की ओर से मित्तल भवन में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, संगीत प्रेमियों, निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने राणा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्रद्धांजलि सभा में अब्दुल सतार राणा के शिष्यों ने संगीतमय प्रस्तुति देकर अपने गुरु को याद किया। उन्होंने प्रसिद्ध गीत “तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे, जब भी सुनोगे गीत तुम…” प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति से सभागार भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों ने राणा के साथ जुड़ी यादों को साझा किया।

संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई

महावीर सिंह शेखावत ने कहा कि अब्दुल सतार राणा राजगढ़ की संगीत परंपरा के मजबूत स्तंभ थे। उन्होंने जीवनभर संगीत साधना को समर्पित रहकर क्षेत्र का नाम रोशन किया और संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। प्रताप सिंह कसवा ने कहा कि राणा ने राजगढ़ क्षेत्र में संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

राणा के पुत्र रफिक राणा और अयूब राणा ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने संगीत को ही अपना जीवन माना और इसी के माध्यम से समाज में सम्मान अर्जित किया। उन्होंने शहरवासियों द्वारा मिल रहे स्नेह और सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया।

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