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72 दिन बाद प्रदीप मेघवाल को मिला इंसाफ का दावा, संघर्ष समिति बोली- लंबी लड़ाई के बाद मानी गईं प्रमुख मांगें


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72 दिन बाद प्रदीप मेघवाल को मिला इंसाफ का दावा, संघर्ष समिति बोली- लंबी लड़ाई के बाद मानी गईं प्रमुख मांगें

72 दिन बाद प्रदीप मेघवाल को मिला इंसाफ का दावा, संघर्ष समिति बोली- लंबी लड़ाई के बाद मानी गईं प्रमुख मांगें

झुंझुनूं : नीट पेपर लीक मामले से आहत होकर आत्महत्या करने वाले झुंझुनूं जिले के कनिकां की ढाणी निवासी और सीकर के गुरु कृपा कोचिंग कॉलेज के छात्र प्रदीप मेघवाल के मामले में संघर्ष समिति ने 72 दिन बाद न्याय मिलने का दावा किया है। समिति का कहना है कि लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।

संघर्ष समिति के अनुसार 15 अप्रैल 2026 को प्रदीप मेघवाल ने कथित रूप से नीट पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद 17 अप्रैल को श्रद्धांजलि सभा के साथ संघर्ष समिति का गठन किया गया। सुरेश मीणा किशोरपुरा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि रवींद्र सिंह पौंख, संदीप सैनी, दारा सिंह मेघवंशी, जेपी महला, शीशराम खटाणा, श्रवण कुमार कांटीवाल, सुरेश पाल सहित कई लोगों ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

समिति ने गांव-गांव कैंडल मार्च निकाले, सीकर और जयपुर में प्रदर्शन किए तथा शहीद स्मारक जयपुर पर सरकार को ज्ञापन सौंपा। बाद में 18 जून को प्रदीप के पिता के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर भी न्याय की मांग उठाई गई। 20 जुलाई को संसद घेराव कार्यक्रम में भी संघर्ष समिति और परिजन शामिल हुए। समिति का आरोप है कि इस दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, जिनमें सुरेश मीणा किशोरपुरा भी शामिल थे।

संघर्ष समिति ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित आंदोलन में सहयोग देने वाले सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।, प्रदीप मेघवाल के परिजनों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता।, शिक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून।, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।

समिति का दावा, ये मांगें हुईं पूरी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।, परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाएगा।, एनटीए के 25 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया तथा 47 अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई।, पेपर लीक माफिया के लिए 10 वर्ष तक की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया।, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे।, संसद घेराव में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे।, लाठीचार्ज में दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

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