दलेलपुरा में शहीद शेरसिंह जाखड़ की प्रतिमा का अनावरण, वीरांगनाओं व पूर्व सैनिकों का हुआ सम्मान
दलेलपुरा में शहीद शेरसिंह जाखड़ की प्रतिमा का अनावरण, वीरांगनाओं व पूर्व सैनिकों का हुआ सम्मान
बबाई : दलेलपुरा गांव में बुधवार को शहीद शेरसिंह जाखड़ की प्रतिमा अनावरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के राज्य मंत्री प्रेमसिंह बाजोर ने की, जबकि मुख्य अतिथि पंजाब से सांसद एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ रहे। कार्यक्रम में खेतड़ी विधायक इंजीनियर धर्मपाल गुर्जर, झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश जांगिड़, कैप्टन धर्मवीर सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम से पूर्व विवेकानंद स्कूल, दलेलपुरा के विद्यार्थियों ने तिरंगा रैली निकालकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद अतिथियों ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर गगनभेदी नारों के बीच प्रतिमा का अनावरण किया। आयोजन संयोजक सूरतसिंह जाखड़ ने अतिथियों का स्वागत किया।

समारोह में शहीद की माता प्रभाती देवी, वीरांगना सुनीता देवी तथा पुत्रियों मीना और माया का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। साथ ही क्षेत्र की 11 वीरांगनाओं एवं पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि शहीद किसी जाति या धर्म के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को शुभ अवसरों पर शहीद स्मारकों पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने की परंपरा विकसित करनी चाहिए। वक्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शहीदों के सम्मान में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए राज्य मंत्री प्रेमसिंह बाजोर की उस पहल की भी सराहना की, जिसके तहत प्रदेशभर में हजारों शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं।

शहीद शेरसिंह जाखड़ का जीवन परिचय
शहीद शेरसिंह जाखड़ का जन्म 10 जुलाई 1974 को दलेलपुरा गांव में बीरबलराम एवं प्रभाती देवी के घर हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गांव में तथा माध्यमिक शिक्षा बिग में प्राप्त करने के बाद वे 1 जुलाई 1996 को 3 राज राइफल्स में भर्ती होकर भारतीय सेना में शामिल हुए। उनका विवाह सिरोही निवासी सुनीता देवी से हुआ। उनकी दो पुत्रियां मीना और माया हैं।

सेना में भर्ती के दौरान पंजाब के फिरोजपुर में 1 जुलाई 1996 को युद्धाभ्यास के दौरान वे शहीद हो गए। उस समय उनकी बड़ी बेटी मीना मात्र दो वर्ष और छोटी बेटी माया पांच माह की थी। वीरांगना सुनीता देवी ने विपरीत परिस्थितियों में दोनों बेटियों का पालन-पोषण कर उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई। वर्तमान में मीना सरकारी अध्यापिका हैं, जबकि माया उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भावुक बना दिया। मंच संचालन अमरजीत सिंह बढ़ेरा एवं सुरेंद्र सिंह बढ़ेरा ने किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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