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महाभ्रष्ट ‘इतिहास’. दागी अतीत, बेखौफ, वर्तमान: लापरवाह कार्यशैली..आखिर किसका संरक्षण? भाजपाइयों ने बार बार की शिकायत फिर भी जनप्रतिनिधि मौन… 


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महाभ्रष्ट ‘इतिहास’. दागी अतीत, बेखौफ, वर्तमान: लापरवाह कार्यशैली..आखिर किसका संरक्षण? भाजपाइयों ने बार बार की शिकायत फिर भी जनप्रतिनिधि मौन… 

फतेहपुर नगर परिषद में 'शहरी सेवा शिविर' बना 'अधिकारी विश्राम शिविर' ​दोपहर 3 बजे ही कुर्सियां खाली, सवाल पूछने पर तमतमाईं विवादित आयुक्त मेडम बोलीं- '24 घंटे सीट पर थोड़ी बैठूंगी!'

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

​फतेहपुर : एक तरफ सूबे की सरकार ‘शहरी सेवा शिविर-2026’ के जरिए आमजन के अटके कामों को मौके पर ही निपटाने का काम शिविर के माध्यम से कर रही हैं।, तो वही दूसरी तरफ फतेहपुर नगर परिषद की आयुक्त मेडम और जिम्मेदार अधिकारी सरकार की साख पर सरेआम सवाल खड़े करवा रहे हैं। तथा सरकार द्वारा चलाए गए शिविर की जमकर पोल खोलने का काम अधिकारी करते नजर आ रहे हैं। सोमवार दोपहर करीब 3:00 बजे जब जनता अपने काम के लिए कतारों में खड़ी पसीना बहा रही हैं।, तब साहबान अपनी कुर्सियों से नदारद दिखाई दे रहे हैं। आयुक्त अनिता खीचड़ खुद सीट से गायब दिखे तो कही कर्मचारी परिषद में गहरी नींद के खर्राटे लेते नजर आए हैं। जिस से झलकता हैं कि जनता त्रस्त हैं और अधिकारी अपनी ही धुन में मस्त हैं।

​’सो गए होंगे तो क्या हो गया?’ – आयुक्त का गैर-जिम्मेदाराना बयान
जब रिपोर्टर ने खाली कुर्सियों और सोते हुए कर्मचारियों का सच दिखाने के लिए नगर परिषद आयुक्त अनीता खीचड़ से उनका पक्ष जानना चाहा, तो वे अपनी पुरानी कार्यशैली के अनुरूप सवालों पर बुरी तरह तिलमिलाती नजर आई जवाबदेही तय करने के बजाय मैडम हाइपर हो गईं और अजीबोगरीब तर्क देते हुए बोलीं – “ये हमारे पीओएन साहब हैं, सो गए होंगे तो क्या हो गया… आंख लग गई होगी! मेरा जेईएन फील्ड में गया है। मैं 24 घंटे सीट पर थोड़ी बैठूंगी! आप लोग मुझे हाइपर कर रहे हो, वो मेरा काम है, देख लेंगे।” ​मैडम कमिश्नर का यह बयान साफ झलकाता है कि उन्हें न तो सरकार के आदेशों का डर है और न ही जनता की परेशानियों की परवाह।

​दागी अतीत, बेखौफ वर्तमान: जवाबदेही तार-तार: एसीबी के रडार पर रहीं आयुक्त की बेलगाम कार्यशैली,

​यह पहला मौका नहीं है जब आयुक्त अनीता खीचड़ अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में हैं। सूत्रों और रिकॉर्ड के अनुसार, पूर्व में विभिन्न शहरों में तैनाती के दौरान मैडम कमिश्नर कथित रूप से रिश्वत जैसे गंभीर मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के रडार पर आ चुकी हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज बताई जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि इतने गंभीर आरोपों और दागी पृष्ठभूमि के बावजूद, इन्हें फतेहपुर जैसी महत्वपूर्ण नगर परिषद की कमान सौंपकर जनता को प्रताड़ित होने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है? आमजन में चर्चा हैं। कि ऐसे अधिकारी को फतेहपुर जैसी जिम्मेदार सीट पर बिठाने के पीछे किसका किसका हाथ हैं।?

​​विश्राम शिविर या सेवा शिविर?
दोपहर 3 बजे जब हमारी टीम ने स्टिंग किया तो सामने आया की 3 बजे ही कुर्सियां खाली हो गईं और कुछ कर्मचारी तो दफ्तर में ही ‘विश्राम’ फरमा रहे थे, तो दूर-दराज से आए नागरिकों के समय और किराए की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?

​जब लाइव तस्वीरों में लापरवाही साफ दिख रही है, तो क्या जिला कलेक्टर इस गंभीर कोताही पर स्वतः संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई करेंगे? या फिर जांच पर मामले को डाल देंगे।

परिषद में खर्राटे लेते कर्मचारी

​एक लोक सेवक का मीडिया के जायज सवालों पर यह कहना कि “24 घंटे सीट पर थोड़ी बैठूंगी”, क्या उनके पद की गरिमा और सेवा नियमों के अनुकूल है?

सरकार की मंशा जनसेवा की है, लेकिन फतेहपुर नगर परिषद की ‘अंदरूनी व्यवस्था’ जनता के लिए सिरदर्द और खोखली बनती नजर आ रही है। यदि ऐसे शिविरों में भी अधिकारियों की यही तानाशाही और लापरवाही भरी तैनाती रही, तो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठेंगे

​अब देखना यह है कि जिला कलेक्टर (सीकर) और सरकार इस तानाशाही और चरमराई व्यवस्था पर कब हंटर चलाते हैं, या फिर लापरवाह तंत्र के आगे जनता ऐसे ही पिसती रहेगी?

शहर मंडल अध्यक्ष भाजपा के आरोप..

भाजपा के अपने ही घेरे में नगर परिषद आयुक्त! विरोध सोशल मीडिया से लेकर पत्रों तक, फिर भी सरकार मौन
फतेहपुर नगर परिषद की आयुक्त अनिता खीचड़ की कार्यशैली को लेकर अब विरोध केवल आमजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा के अपने पदाधिकारी भी खुलकर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर पार्टी नेतृत्व को लिखे गए पत्रों तक, भाजपा नेताओं ने नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

पूर्व भाजपा जिला महामंत्री के आरोप

भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष अमित तिवाड़ी ने प्रदेशाध्यक्ष को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि नगर परिषद में भ्रष्टाचार चरम पर है तथा आवासीय पट्टों के मामलों में कथित अवैध चौथ वसूली हो रही है। वहीं पूर्व भाजपा जिला महामंत्री एडवोकेट पंकज शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि फतेहपुर नगर परिषद भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है, जिससे भाजपा सरकार की छवि आमजन में खराब और प्रभावित हो रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सत्ता पक्ष के जिम्मेदार पदाधिकारी ही लगातार शिकायतें और आरोप सार्वजनिक रूप से उठा रहे हैं, तब भी सरकार की ओर से यदि जांच या ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं। विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक कहकर टाला जा सकता है, लेकिन जब अपनी ही पार्टी के नेता गंभीर शिकायतें दर्ज करा रहे हों, तब सरकारी चुप्पी चर्चा का विषय बन जाती है। “यदि सब कुछ बेबुनियाद है तो निष्पक्ष जांच करवा दीजिए, और यदि शिकायतें सही हैं तो कार्रवाई कर दीजिए। लेकिन शिकायतें भी चलती रहें और कुर्सियां भी सुरक्षित रहें – यह व्यवस्था जनता की समझ से बाहर है।” आमजन में लगातार सवाल लगातार सुलग रहे हैं। लेकिन फिर भी सब कुछ सुस्त हैं।

इन्होंने कहा की 
क्या हो गया कर्मचारी सो गया तो आंख लग गई होगी। 24 घंटे सीट पर ही थोड़ी बैठी रहूंगी – अनिता खीचड़, आयुक्त नगर परिषद फतेहपुर

आयुक्त नगर परिषद फतेहपुर

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