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झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने 35 मामलों पर सुनाया फैसला:2017 से लंबित मामलों का भी हुआ निस्तारण, फास्ट ट्रैक जस्टिस को मिली गति


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झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने 35 मामलों पर सुनाया फैसला:2017 से लंबित मामलों का भी हुआ निस्तारण, फास्ट ट्रैक जस्टिस को मिली गति

झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने 35 मामलों पर सुनाया फैसला:2017 से लंबित मामलों का भी हुआ निस्तारण, फास्ट ट्रैक जस्टिस को मिली गति

झुंझुनूं : झुंझुनूं के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शुक्रवार को एक ही दिन में रिकॉर्ड 35 मुकदमों की सुनवाई की। आयोग के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार मील ने निर्णय लिखवाकर तुरंत आदेश जारी कर दिए।

दरअसल, उपभोक्ता आयोग में लंबे समय से लंबित इन 35 मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत की प्री-काउंसलिंग (आपसी समझाइश) के लिए न्याय टेबल पर रखा गया था। काफी समझाने के बाद भी जब दोनों पक्षों के बीच राजीनामा नहीं हो पाया, तो आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी की पीठ ने समय बर्बाद न करते हुए कड़ा रुख अपनाया।

2017 से लंबित मामलों का भी हुआ निपटारा

राज्य आयोग के 26 फरवरी 2026 के परिपत्र (गाइडलाइन) के अनुसार दोपहर तक सभी पक्षों की बहस सुनी गई और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शुक्रवार को ही सभी 35 मुकदमों का अंतिम निपटारा कर दिया गया। इनमें कई मामले जनवरी 2017 से लंबित थे, जिनके निपटारे से पुरानी पेंडेंसी भी खत्म हुई और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली।

बीमा कंपनियों और बैंकों के मामलों में भी सुनवाई पूरी

इन मामलों में बीमा कंपनियों, बैंकों और सहकारी समितियों से जुड़े विवाद शामिल थे। वकीलों की ओर से समय-समय पर कई प्रार्थना पत्र देकर मामलों को टालने की कोशिश की गई, लेकिन आयोग ने सभी पक्षों की सुनवाई कर साक्ष्य लिए और अंतिम फैसला सुनाया।

तेज न्याय व्यवस्था की दिशा में बड़ी पहल

इस त्वरित कार्रवाई को फास्ट ट्रैक जस्टिस के सिद्धांत को जमीन पर उतारने की बड़ी पहल माना जा रहा है। आयोग ने इस वर्ष लंबित मामलों के निस्तारण का 500 प्रतिशत तक लक्ष्य पूरा करने का संकल्प भी व्यक्त किया है, जिससे न्याय व्यवस्था को और गति मिलने की उम्मीद है।

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