टोल की ‘पर्ची’ पर बिजली की ‘कैंची?’: एक्स ई एन साहब की ‘ईगो’ ने बुझा दिए टोल प्लाजा की रोशनी के चिराग!
सरकारी रसूख का 'शॉर्ट सर्किट' - टोल की बिजली कटवाने के आरोप में एक्सईएन सस्पेंड, जनता को अब जांच का इंतजार
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान
सीकर/झुंझुनूं : कहते हैं सरकारी कुर्सी पर बैठते ही कुछ लोगों को लगता है कि ‘ब्रह्मांड की कमान’ उनके हाथ में आ गई है। ताजा मामला अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सीकर ग्रामीण क्षेत्र का है, जहाँ एक एक्सईएन साहब ने अपनी ‘अना’ की लड़ाई में पूरे विभाग की ही छवि की बत्ती गुल करवा दी। टोल पर टैक्स की मामूली पर्ची को लेकर शुरू हुई तकरार ऐसी बढ़ी कि एक्स ई एन साहब ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर पूरे टोल प्लाजा की बिजली ही कटवा दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक्स ई एन साहब निजी वाहन से टोल गेट पार कर रहे थे टोलकर्मी ने पैसे मांगे तो बहस छिड़ गई। बहस इतनी बढ़ गई कि साहब ने टोल का बिजली कनेक्शन ही कटवा दिया। नतीजा? विभाग ने एक्स ई एन साहब को ऐसा ‘झटका’ दिया कि साहब सीधे सस्पेंड होकर झुंझुनूं हेडक्वार्टर पहुंच गए।
विवाद की ‘अर्थिंग’ और रसूख का ‘वोल्टेज’
मामला दूजोद टोल प्लाजा का बताया जा रहा है। सूत्रों और आदेशों की मानें तो टोल कर्मियों और अधिकारी के बीच टोल के पेमेंट को लेकर कथित तौर पर तीखी बहस हुई। अब आम आदमी होता तो बहस करके आगे बढ़ जाता, लेकिन साहब तो ‘पावर’ के मालिक ठहरे! आरोप है कि उन्होंने तत्काल प्रभाव से एफ आर टी टीम को ‘फरमान’ सुना दिया कि टोल प्लाजा की तुरंत बिजली काट दी जाए। सवाल यह है कि क्या सरकारी मशीनरी किसी की निजी जागीर है? टोल प्लाजा जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक जगह की बिजली गुल करना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पद का प्रथम दृष्टया दुरुपयोग भी माना जा रहा है।

सरकारी कुर्सी बनी निजी बदले का हथियार?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरकारी अधिकारी अपनी व्यक्तिगत नाराजगी निकालने के लिए आम जनता की सुविधाओं से खिलवाड़ कर सकते हैं? अगर आदेश में लगाए गए आरोप सही हैं तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सरकारी ताकत के खुले दुरुपयोग का मामला माना जा रहा है। टोल प्लाजा जैसी सार्वजनिक व्यवस्था की बिजली कटवाना सीधे तौर पर व्यवस्था और सुरक्षा दोनों को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है।
निलंबन आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग में “व्यक्तिगत अहंकार” की कोई जगह नहीं है। आदेश की भाषा खुद चीख-चीख कर कह रही है कि बिजली विभाग के एक्सईएन हेमराज का आचरण एक ‘पब्लिक सर्वेंट’ की गरिमा के बिल्कुल विपरीत था। अधिकारी ने न केवल अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया, बल्कि विभाग की छवि को भी ‘अंधेरे’ में धकेल दिया।
निलंबन: सजा या सिर्फ खानापूर्ति?
प्रबंधन ने हेमराज को निलंबित कर झुंझुनूं स्थित जोनल चीफ इंजीनियर कार्यालय अटैच कर दिया था। लेकिन जनता के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है: क्या रसूखदार अधिकारियों के लिए सरकारी सिस्टम ‘निजी बदला’ लेने का औजार बन गया है? अगर यही हरकत किसी आम नागरिक ने की होती, तो क्या अब तक वह सलाखों के पीछे नहीं होता?
जांच होगी निष्पक्ष या अफसरशाही बचाने में दफन होगा सच?
पब्लिक डोमेन में अब इस मामले को “अहंकार बनाम अनुशासन” की नजर से देखा जा रहा है। यह घटना उन सभी अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है जो जनसेवा की शपथ लेकर ‘तानाशाही’ के मोड में चले जाते हैं। साहब शायद भूल गए थे कि बिजली विभाग में ‘कट’ मारना आसान है, लेकिन जब जनता और प्रशासन ‘रिटर्न करंट’ मारता है, तो बड़े-बड़ों के फ्यूज उड़ जाते हैं। विभागीय जांच क्या इस मामले की जड़ तक जाएगी, या यह निलंबन महज एक ठंडी छींट बनकर रह जाएगा? सबकी निगाहें अब एम डी कार्यालय अजमेर पर टिकी हुई हैं।
इनका क्या कहना हैं
जब हमारी टीम ने जब एक्स ई एन हेमराज जी से बात की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बात नही हैं मुझे बहाल कर दिया गया हैं।
झुंझुनूं चीफ का क्या कहना हैं
मेने सस्पेंशन ऑर्डर पढ़ा नही मुझे ज्यादा इस मामले में कोई जानकारी नहीं हैं। उसको वापस वहीं पर लगा दिया गया हैं। जहां पहले था। विभागीय जांच चल रही हैं। टोल पर क्या बात हुई मुझे जानकारी नहीं हैं। वाहन उनके पास निजी था या सरकारी मेरी जानकारी में नही हैं। – सीसराम वर्मा संभागीय मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड झुंझुनूं
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