‘बीमा कंपनी सिर्फ मुनाफा न देखे न्याय भी करे’:कंपनी को 4.19 लाख रुपए 9% ब्याज सहित देने होंगे, ओवरलोडिंग बता खारिज किया था क्लेम
'बीमा कंपनी सिर्फ मुनाफा न देखे न्याय भी करे':कंपनी को 4.19 लाख रुपए 9% ब्याज सहित देने होंगे, ओवरलोडिंग बता खारिज किया था क्लेम
झुंझुनूं : झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को परिवादी को 4.19 लाख रुपए 9% ब्याज सहित देने का फैसला सुनाया है। कंपनी ने क्लेम खारिज करते हुए कहा था कि गाड़ी ओवरलोड है और इसी वजह से एक्सीडेंट हुआ।
क्या था मामला
1. एक्सीडेंट का क्लेम खारिज किया: कुलोठ खुर्द निवासी रमजान ने अपनी बोलेरो का इंश्योरेंस यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था। 19 मार्च 2017 को यह वाहन एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गया, जिसमें गाड़ी पूरी तरह डैमेज हो गई। जब परिवादी ने बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने यह कहते हुए इसे निरस्त (Reject) कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठी थीं, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
2. साबित नहीं कर पाई कंपनी: आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील एवं सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी की बेंच ने मामले की गंभीरता से सुनवाई की। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि दुर्घटना का मुख्य कारण अधिक सवारियां होना ही था।

हर्जाना और ब्याज
सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर 4,19,000 रुपये क्षतिपूर्ति राशि के रूप में देने। परिवाद दायर करने की तिथि (23 अगस्त 2018) से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज। मानसिक संताप के रूप में उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 55,000 रुपए का हर्जाना देने निर्देश दिए हैं। वाद खर्च के रूप में 5,500 रुपए देने के निर्देश दिए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि इंश्योरेंस कंपनी निर्धारित अवधि के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे संपूर्ण राशि पर 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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