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जनमानस शेखावाटी NEWS IMPACT : ​कलम की दहाड़ से लगी ‘काल वाहिनियों’ पर लगाम, रंग लाई जनमानस शेखावाटी की मुहिम


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जनमानस शेखावाटी NEWS IMPACT : ​कलम की दहाड़ से लगी ‘काल वाहिनियों’ पर लगाम, रंग लाई जनमानस शेखावाटी की मुहिम

स्पेशल रिपोर्ट : जब सड़कों पर उतरा कानून, अवैध स्कूली वाहनों में मचा हड़कंप..!! कोतवाल की वाहन बदलो 'ट्रिक' पर उठे सवाल..? RTO की ताबड़तोड़ कार्रवाई से मची खलबली..

जनमानस शेखावाटी ब्यूरो चीफ : आबिद खान दाडून्दा

​फतेहपुर : एक ओर जहाँ कस्बे में बाल वाहिनी के नाम पर अवैध क्रूजर वाहनों की घोर लापरवाही की खबरें प्रकाशित होने के बाद, ताबड़तोड़ कार्रवाई के लिए माने जाने वाले कोतवाल महेंद्र मीणा ने उसी स्कूल की अवैध क्रूजर गाड़ी को पकड़ने के बजाय दूसरी बस को थाने बुलाकर कागजी खानापूर्ति कर दी गई थी, वहीं दूसरी ओर उसी शहर में परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों पर चेकिंग अभियान चलाते हुए सख्त कार्रवाई की है।

जिससे कोतवाल महेंद्र मीणा की “वाहन बदलो” ट्रिक सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है।
मासूमों के बस्तों का बोझ तो उनके कंधों पर होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उन बस्तों के साथ वे रोज ‘मौत का सफर’ भी तय करते हैं? जब सड़कों पर फर्राटा भरती स्कूल बसें ‘बाल वाहिनी’ नहीं, बल्कि ‘काल वाहिनी’ बन जाएं, तो समाज को जागना ही पड़ता है।

जनमानस शेखावाटी न्यूज के ब्यूरो चीफ आबिद खान दाडून्दा और उनकी टीम के अनिल शेखिसर ने जब इस ‘मौत के ट्रांसपोर्ट’ के खिलाफ अपनी कलम उठाई और उन मासूमों के ‘मौत के सौदागरों’ के खिलाफ लिखना शुरू किया, तो उनका मकसद सिर्फ हेडलाइन बनाना नहीं, बल्कि उन नन्हीं जिंदगियों को बचाना था, जो रसूख और लापरवाही की भेंट चढ़ सकती थीं।

लगातार खबरों के बाद फतेहपुर में आरटीओ हनुमान सिंह तरड़ ने अवैध स्कूली वाहनों पर अभियान चलाकर कानून का डंडा चलाना शुरू कर दिया है।

वाहन बदलो ट्रिक के बाद कोतवाल की कार्यशैली पर भी उठे सवाल?

बीते दिनों फतेहपुर कस्बे में स्कूलों के परिणाम का जश्न बीच बाजार में मनाया जा रहा था, जहाँ एक अवैध स्कूली वाहन, अवैध नंबर प्लेट के साथ बच्चों को वाहन की छत पर चढ़ाकर ‘मौत का डांस’ करवा रहा था। खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कोतवाल महेंद्र मीणा को क्रूजर वाहन और बस में फर्क नजर नहीं आया, और उसी स्कूल की दूसरी बस को थाने बुलाकर इतिश्री हासिल कर ली गई।

इतना ही नही कोतवाल महेंद्र मीणा ने मीडिया और पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुप में उसका फोटो डालकर यह दिखाने की कोशिश की थी कि कार्रवाई कर दी गई है, जबकि सच्चाई यह थी कि अवैध वाहन जिस पर बच्चो से मौत का डांस करवाया जा रहा था वो वाहन कोई और था। इस घटना के बाद कस्बे में कोतवाल की “वाहन बदलो ट्रिक” गंभीर सवालों के घेरे में है।

​जब अखबार बना आवाज, रंग लाई जनमानस शेखावाटी न्यूज की मुहिम..

लंबे समय से आबिद खान दाडून्दा के नेतृत्व में जनमानस शेखावाटी न्यूज की टीम के अनिल शेखिसर ने इस मुद्दे को पूरी शिद्दत और जिम्मेदारी के साथ उठाया। बार-बार खबरें प्रकाशित कर यह सवाल प्रशासन और सरकार से पूछा गया-क्या कानून केवल आम आदमी का चालान काटने के लिए ही है?

एक ओर बिजली विभाग की गाड़ियाँ बिना नंबर प्लेट और बिना फिटनेस के सड़कों पर रौब जमा रही थीं, तो दूसरी ओर स्कूली वाहन बिना कागजों के मासूमों को असुरक्षित ‘मौत का सफर’ करवा रहे थे। कभी ये वाहन मौत को ओवरटेक करते नजर आते थे। इस पूरे मामले में जनमानस शेखावाटी न्यूज ने प्रशासन की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर लगातार प्रहार किया। कभी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए, तो कभी परिवहन विभाग की विफलता को आईना दिखाया।

​जागा परिवहन विभाग, आरटीओ की ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू
लगातार जनदबाव और मीडिया की पैनी कलम के असर का ही नतीजा है कि परिवहन विभाग अंततः हरकत में आया। आरटीओ इंस्पेक्टर हनुमान सिंह तरड़ ने मोर्चा संभालते हुए अपनी टीम के साथ सबसे पहले बिजली विभाग के अवैध वाहनों पर शिकंजा कसा। बिजली विभाग में चल रही अवैध मशीनों पर करीब एक-एक लाख रुपये के चालान काटे गए। इसी क्रम में सोमवार को एक विशेष अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की सघन चेकिंग की गई। जिन वाहनों के कागजों में खामियां पाई गईं, उन पर सख्त कार्रवाई की गई। आरटीओ हनुमान सिंह तरड़ का यह कदम सराहनीय है। लंबे समय से जो बिजली विभाग और स्कूल संचालक खुद को ‘कानून से ऊपर’ समझकर मनमानी कर रहे थे, आज उन्हें आईना दिखाने का काम परिवहन विभाग ने किया है। यह कार्रवाई साबित करती है कि जब प्रशासन चाहे, तो रसूखदारों के आगे भी कानून का डंडा बराबरी से चल सकता है।

क्या अब भी ‘अंधा’ है कानून?
सवाल अब भी बरकरार है..! क्या यह कार्रवाई केवल एक दिन का दिखावा है या व्यवस्था में आया स्थायी सुधार? शहर की सड़कों पर कोतवाल की “वाहन बदलो ट्रिक” और दोहरी नीति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। मगर आरटीओ ने अभियान चलाकर यह साबित कर दिया कि यदि सख्ती हो, तो सुधार संभव है।

एक तरफ आम नागरिक से हेलमेट न होने पर भारी जुर्माना वसूला जाता है, और दूसरी तरफ रसूखदारों की बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियाँ पुलिस की नाक के नीचे से ‘वीआईपी’ की तरह गुजरती हैं। क्या पुलिस प्रशासन तब तक ‘अंधा’ बना रहेगा, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए? बहरहाल, अब देखना यह होगा कि क्या कोतवाल महेंद्र मीणा उस वास्तविक अवैध वाहन को खोज निकालते हैं या नहीं।

​मासूमों की मुस्कान ही असली जीत
जनमानस शेखावाटी न्यूज की यह मुहिम उन मासूम बच्चों के लिए एक बड़ी जीत है, जो हर रोज घर से निकलते वक्त यह नहीं जानते कि वे सुरक्षित लौटेंगे या नहीं। आबिद खान दाडून्दा और अनिल शेखिसर ने न केवल पत्रकारिता का धर्म निभाया है, बल्कि समाज के उस नासूर को उजागर किया है, जो धीरे-धीरे बच्चों की जान ले रहा था। हम प्रशासन से उम्मीद करते हैं कि यह अभियान केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित न रहे। जब तक हर स्कूली वाहन पूरी तरह वैध और सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहनी चाहिए। हमारा यह प्रयास आखिरकार रंग लाया है-और उम्मीद है कि आने वाले समय में सड़कों पर ‘काल वाहिनी’ नहीं, बल्कि ‘सुरक्षा’ दौड़ेगी।

इनका क्या कहना हैं
मैंने मेरी पूरी टीम के साथ पूर्व में अभियान चलाकर फतेहपुर में बिना कागजों के चलने वाले बिजली विभाग के कई वाहनों पर कानूनी कार्रवाई की है तथा हमारे द्वारा एक-एक स्कूल में जाकर नोटिस दिया गया कि स्कूली वाहनों के कागज 5 दिन में ठीक करवा लीजिए, वरना उन्हें सड़क पर नहीं चलने दिया जाएगा। इसके बाद आज एक सघन अभियान के तहत कई स्कूली वाहनों की जांच करते हुए बिना कागजों वाले वाहनों पर कार्रवाई की गई है। और अब यह अभियान लगातार सड़कों पर जारी रहेगा और किसी भी अवैध वाहन को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो। – हनुमान सिंह तरड़, आरटीओ (इंस्पेक्टर) उप परिवहन कार्यालय, फतेहपुर सीकर

पूर्व में चलाई गई खबरे

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