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रिश्वत मांगने वाले DSP को 4 साल की सजा:मुकदमे में एफआर लगाने के नाम पर मांगी थी घूस, सहयोगी को साढ़े 3 साल की जेल


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रिश्वत मांगने वाले DSP को 4 साल की सजा:मुकदमे में एफआर लगाने के नाम पर मांगी थी घूस, सहयोगी को साढ़े 3 साल की जेल

रिश्वत मांगने वाले DSP को 4 साल की सजा:मुकदमे में एफआर लगाने के नाम पर मांगी थी घूस, सहयोगी को साढ़े 3 साल की जेल

सीकर : सीकर जिले में रिश्वत मांगने के मामले में रींगस DSP को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने सजा सुनाई। कोर्ट के जज अखिलेश कुमार ने गुरुवार को DSP नाथूराम महरानियां को 4 साल की जेल और उसके सहयोगी मनोज अग्रवाल को साढ़े 3 साल की सजा सुनाई है।

सहायक निदेशक अभियोजन मुकेश कुमार सिर्वा ने बताया- ढाई साल पहले परिवादी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एफआर लगाने के लिए सहयोगी मनोज अग्रवाल ने 2 लाख रुपए की डिमांड की थी। इसके बाद एक लाख रुपए देना तय हुआ था। एसीबी ने ट्रैप करते हुए 50 हजार रुपए के साथ सहयोगी मनोज को पकड़ा था। DSP नाथूराम महरानियां के लिए मनोज रिश्वत ले रहा था।

ये था मामला

सहायक निदेशक अभियोजन मुकेश कुमार सिर्वा ने बताया- अगस्त 2014 को नारायण सिंह ने जयपुर एसीबी ऑफिस में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि 12 नवंबर 2013 को उसके ताऊ के लड़के सिकंदर और उनकी पत्नी सहित 5 से 7 लोगों ने जमीन में खाद डालने के दौरान मुझ पर जानलेवा हमला किया। इस मामले को लेकर खाटूश्यामजी पुलिस थाने में एक-दूसरे के खिलाफ केस दर्ज कराए गए। नारायण सिंह द्वारा करवाए गए मुकदमे में आरोपी सिकंदर गिरफ्तार हो गया था और बाकी आरोपी गिरफ्तार होना बाकी थे।

मामले में राजीनामा करने के लिए सिकंदर ने अपनी पत्नी मंजू देवी के साथ मिलकर षड्यंत्र रचते हुए झूठा मुकदमा कोर्ट इस्तगासे से दर्ज करवाया। इसकी जांच SHO दांतारामगढ़ को दी गई थी। खाटूश्यामजी में किराने की दुकान चलाने वाले मनोज अग्रवाल ने नारायण सिंह के भाई विजयसिंह को 1 अगस्त 2014 को कहा कि तुम्हारे भाई के मुकदमे की जांच रींगस DSP के पास आ गई है। सामने वाली पार्टी ने बड़ी सिफारिश करवाई है। उन्होंने अब नारायणसिंह का चालान करवाने की पूरी तैयारी कर रखी है। अगर बचाना है तो आकर बात कर लो। वह रींगस DSP से मिलकर काम बैठा देगा।

2 लाख की डिमांड रखी, एक लाख रुपए देना तय हुआ

नारायण सिंह बाद में मनोज अग्रवाल से मिला। मनोज ने कहा- उसके DSP नाथूराम महरानियां से अच्छे संबंध हैं। DSP दो लाख रुपए की डिमांड कर रहे हैं। बाद में 1 लाख रुपए देना तय हुआ। इसके बाद एसीबी ने मनोज अग्रवाल को 50 हजार रुपए की रिश्वत DSP नाथूराम महरानियां के लिए लेते हुए पकड़ा। एसीबी ने मनोज और नाथूराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया। इसके बाद अब तत्कालीन डीवाईएसपी नाथूराम महरानियां और उसके दलाल मनोज अग्रवाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट के जज अखिलेश कुमार ने सजा सुनाई। तत्कालीन DSP को 4 साल की जेल और 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं मनोज अग्रवाल को साढ़े 3 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

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